डीयू-यूजीसी विवाद: पीआईएल पर सुनवाई से इंकार

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा दिल्ली विश्वविद्यालय को चार साल के स्नातक पाठ्यक्रम समाप्त करने के लिए दिए गए निर्देश को रद्द करने की मांग करने वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया. न्यायमूर्ति विक्रमजीत सेन एवं न्यायमूर्ति शिव कीर्ति सिंह की खंडपीठ ने आईपीएल दाखिल करने वाले दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के पूर्व अध्यक्ष आदित्य नारायण मिश्रा से उच्च न्यायालय में इस संबंध में दरख्वास्त करने के लिए कहा.

डीयू-यूजीसी के टकराव के चलते मंगलवार को दिल्ली के कॉलेजों में प्रवेश रोक दिया गया है.इसका फैसला दिल्ली के 36 कॉलेजों के प्रिंसिपलो की आपात बैठक में लिया गया है. बैठक के बाद दिल्ली प्रिंसिपल संघ के अध्यक्ष एसके गर्ग ने कहा कि “जब तक इस मुद्दे पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं होता, एडमिशन प्रक्रिया पर रोक रहेगी.” दरअसल डीयू चाहता है कि 4 वर्षीय अंडर ग्रेजुएट कोर्स को जारी रखा जाये वहीं, यूजीसी ने इस कोर्स को बंद करने के लिये कहा है.


इसके अलावा यूजीसी ने सर्कुलर जारी करके कहा है कि उसके आदेश को न मानने से दिया जाने वाला अनुदान रोका जा सकता है. गौरतलब है कि यूजीसी देश के विश्वविद्यालयों को गाइड लाइन देने के अलावा उन्हें सरकारी अनुदान भी उपलब्ध करवाता है. इस बीच केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्रालय यूजीसी के समर्थन में आ गया है. जिससे छात्रों में खुशी है परन्तु कॉलेजों में प्रवेश रोक दिये जाने से वे परेशान हैं. मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि “डीयू, यूजीसी की गाइडलाइन माने.”

लुटियंस के दिल्ली ने यूं तो कई उतार-चढ़ाव देखे परन्तु ऐसा पहली बार हो रहा है कि डीयू-यूजीसी के विवाद में छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया हो. वास्तव में विवाद की जड़ डीयू द्वारा 4 वर्षीय अंटर ग्रेजुएट कोर्स को लेकर है. यूजीसी की समझ है कि इसे 3 वर्षीय कर देना चाहिये. इसके अलावा डीयू के निर्णय को गैर-कानूनी भी माना जा रहा है क्योंकि 4 वर्षयी अंडर ग्रेजुएट कोर्स के अध्यादेश के लिये विजीटर, जो देश के राष्ट्रपति होते हैं, उनकी मंजूरी नहीं ली गई है. डीयू ने तो अपने इस फैसले से न तो केन्द्र सरकार के मानव संसाधन मंत्रालय को अवगत कराया है और न ही यूजीसी की अनुमति ली है.

उधर, डीयू-यूजीसी टकराव को लेकर छात्र तथा शिक्षकों की राजनीति शुरु हो गई है. सोमवार को इस विवाद को सुलझाने के लिये दो बड़े छात्र संगठनों एनएसयूआइ और एबीवीपी की बैठक बुलायी गयी थी. जिसमें किसी नतीजे पर पहुंचने के बजाये उनके बीच में हाथापाई की नौबत आ गई. इस पाठ्यक्रम के विरोध में मानव संसाधन विकास मंत्रालय के बाहर ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन, आइसा के छात्रों ने प्रदर्शन किया. आइसा के छात्रों ने डीयू के खिलाफ नारेबाजी की और एफवाइयूपी को तत्काल समाप्त करने की मांग की.

गौरतलब है कि डीयू ने 4 वर्षीय अंडर ग्रेजुएट कोर्स पिछले साल ही शुरु किया था. इस प्रकार से इसके पहले बैच का यब दूसरा साल है ऐसे में डीयू-यूजीसी में इस अंटर ग्रेजुएट कोर्स को लेकर विवाद होने से छात्रों को समझ में नहीं आ रहा है कि उनका भविष्य क्या होगा. वहीं, नये साल के लिये प्रवेश को रोक देने से भी छात्र परेशान हैं.

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