नगद सब्सिडी सही तरीका: आर्थिक सर्वेक्षण

नई दिल्ली | संवाददाता: 2014-15 में देश की विकास दर 5.4-5.9 फीसदी रहने की संभावना है. इसी के साथ महंगाई चिंता का विषय बना रहेगा. संसद में बुधवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा 2013-14 के लिए पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण में यह भी कहा गया कि नकद सब्सिडी भुगतान उर्वरकों पर सब्सिडी देने का सही तरीका है और ईंधन की कीमतें बाजार पर आधारित होनी चाहिए.

इस सर्वेक्षण में वित्तीय घाटा कम किए जाने के लिए सिर्फ खर्च-जीडीपी अनुपात घटाने की जगह अधिक कर-जीडीपी अनुपात का सुझाव दिया गया है. 2013-14 में वित्तीय घाटा जीडीपी का 4.5 फीसदी रहा तथा आक्रामक नीतिगत पहल ने 2013-14 में सरकार को वित्तीय घाटा कम करने में मदद की.

वहीं,वर्ष 2013-14 में देश के बकाया-भुगतान की स्थिति काफी सुधरी है. चालू खाता घाटा 32.4 अरब डॉलर, जीडीपी का 1.7 फीसदी रहा, जो 2012-13 में 88.2 अरब डॉलर, जीडीपी का 4.7 फीसदी था.

इस सर्वेक्षण में कहा गया है कि रुपये की वार्षिक औसत विनिमय दर 2013-14 में प्रति डॉलर 60.50 रुपये रही, जो 2012-13 में 54.41 रुपये थी और जो 2011-12 में 47.92 रुपये थी. देश का विदेशी पूंजी भंडार मार्च 2014 के आखिर में बढ़कर 304.2 अरब डॉलर हो गया, जो मार्च 2013 के आखिर में 292 अरब डॉलर था.

देश में योजना एवं पूंजी खर्च में कटौती के जरिए वित्त वर्ष 2013-14 में राजकोषीय घाटे को जीडीपी का 4.5 प्रतिशत पर किसी तरह रोका गया, जो कि अपने आप में अस्थिर है. यह बात सरकार द्वारा बुधवार को संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2013-14 में कही गई है. इसमें कहा गया है कि देश की राजकोषीय स्थिति जितनी बुरी दिख रही है, वाकई में उससे भी अधिक बुरी है.

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने संसद में आर्थिक सर्वेक्षण पेश करते हुए कहा कि अर्थव्यवस्था के लिए आर्थिक मजबूती आवश्यक है, मौजूदा संदर्भ में और आगामी वर्षो के संदर्भ में भी.

वित्त मंत्रालय में वरिष्ठ सलाहकार इला पटनायक द्वारा तैयार वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि खाद्य, उर्वरक और पेट्रोलियम सब्सिडी के जोखिम से निपटना जरूरी है.

सर्वेक्षण में कहा गया है, “एक अन्य चुनौती कर आधिक्य को सुधारने की है, और गैर-डेट प्राप्तियां में गिरावट को धन उगाही और सुधारों में अधिक प्रयासों के जरिए रोका जा सकता है.”


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