महाराष्ट्र को खलेगी मुंडे की कमी

मुंबई | संवाददाता: गोपीनाथ मुंडे के निधन से महाराष्ट्र भाजपा सकते में है. किसी को यकीन नहीं हो रहा है कि उनके मुंडे साहब अब इस दुनिया में नहीं रहे.

गौरतलब है कि सोमवार को नई दिल्ली में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री और महाराष्ट्र बीजेपी के दिग्गज नेता गोपीनाथ मुंडे का सड़क हादसे में निधन हो गया. वह 64 साल के थे. गोपीनाथ ने 8 दिन पहले ही केंद्रीय मंत्री के रूप में शपथ ली थी. नरेंद्र मोदी सरकार में उन्हें ग्रामीण विकास मंत्री बनाया गया था.

विडंबना ही कहेंगे कि गोपीनाथ मुंडे उसी प्रमोद महाजन परिवार से थे, जो ऐसे ही दुर्भाग्यपूर्ण हादसों का शिकार होता रहा है. उनके मंत्री और भांजी पूनम महाजन के सांसद बनने से महाजन परिवार में जो रौनक लौटी थी, वह इस हादसे से एक झटके में काफूर हो गई.

22 अप्रैल 2006 को प्रमोद महाजन की उन्हीं के छोटे भाई प्रवीण महाजन ने गोली मारकर हत्या कर दी थी. मुंडे की तीन बेटियां हैं, पंकजा, प्रीतम और यशश्री. पंकजा परली से विधायक हैं और महाराष्ट्र भाजपा युवा मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष हैं. मुंडे महाराष्ट्र राजनीति में लंबे समय से सक्रिय थे. जनसंघ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से उनका रिश्ता बहुत पुराना था.

34 साल पहले 1980 में ही वह पहली बार विधायक बन गए थे. 1980 से 1985 और 1990 से 2009 तक वह विधायक रहे. इसके बाद वह लोकसभा चले गए. 1992 से 1995 तक वह महाराष्ट्र महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता रहे. 1995 में जब बीजेपी-शिवसेना की सरकार आई तो मुंडे को उपमुख्यमंत्री बनाया गया. 2009 में वह बीड संसदीय सीट से सांसद चुने गए. हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में भी वह इसी सीट से जीते.

मुंडे की छवि एक जमीनी नेता की थी. वह राजनीतिक विरोधियों से भी अच्छे संबंध रखने के लिए जाने जाते थे. मुंडे का जन्म महाराष्ट्र के परली में 12 दिसंबर 1949 को हुआ था. उनके परिवार में बहन सरस्वती कराड़ भी हैं. बहन से बड़े एक भाई हैं पंडित अन्ना, जो सामाजिक-राजनीतिक काम से जुड़े हैं. वह अपने परिवार की तीसरी संतान थे. उनके दो छोटे भाई भी हैं, माणिकराव और वेंकटराव. हालांकि उनके दोनों भाई राजनीति में मुंडे की तरह सक्रिय नहीं हैं.

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