ग्वालियर में 6 सांसदों की प्रतिष्ठा दांव पर

ग्वालियर | एजेंसी: मध्य प्रदेश में चुनाव भले ही विधानसभा के हो रहे हों, मगर ग्वालियर जिले में छह सांसदों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है. ग्वालियर जिला छह सांसदों का निवास स्थल है और जिले से लोकसभा में छह सांसद मुख्य राष्ट्रीय दलों का प्रतिनिधित्व करते हैं. जिन छह सांसदों को लोकसभा में जिले का गौरव बढ़ाने का मौका मिला है, उनमें पांच भारतीय जनता पार्टी के और एक कांग्रेस से हैं.

राज्य से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक में ग्वालियर का खास स्थान रहा है. बात भाजपा की करें तो इसी शहर ने उसे अटल बिहारी वाजपेयी, विजयराजे सिंधिया और कुशाभाउ ठाकरे जैसे नेता दिए हैं. वहीं कांग्रेस के माधवराव सिंधिया का नाता भी इसी शहर से रहा है.


वर्तमान दौर में देखें तो ग्वालियर भाजपा के नेताओं का गढ़ है. राज्यसभा सांसद भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा, माया सिंह, कप्तान सिंह, लोकसभा सांसद व भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर व यशोधरा राजे सिंधिया का निवास स्थान भी इसी जिले में है. वहीं कांग्रेस के सांसद व केंद्रीय उर्जा राज्य मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी यहीं से हैं.

इस जिले में छह विधानसभा क्षेत्र हैं, वर्ष 2008 के चुनाव में यहां से तीन सीटों पर कांग्रेस, दो पर भाजपा और एक पर बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार ने जीत दर्ज की थी. भाजपा ने इस बार दो प्रत्याशियों, यशोधरा राजे सिंधिया व माया सिंह को क्रमश: शिवपुरी और ग्वालियर से विधानसभा चुनाव में उतारा है.

देश और राज्यों की राजधानी को छोड़कर संभवत: ग्वालियर एकलौता ऐसा जिला होगा जहां छह सांसदों का निवास स्थल है. भाजपा और कांग्रेस के प्रमुख नेताओं के प्रभाव वाला जिला होने के कारण यह उनकी प्रतिष्ठा से जुड़ गया है.

वरिष्ठ पत्रकार देव श्रीमाली का कहना है कि इस जिले को ज्यादा जनप्रतिनिधियों का अभिशाप भोगना पड़ रहा है. बीते 10 वर्षो मे किसी भी सांसद ने ऐसा कोई काम नहीं किया है, जिसे वे अपनी या पार्टी की उपलब्धि गिना सकें. बात विकास की करें तो उनके पास पुल, पुलिया और नालों से ज्यादा गिनाने को कुछ भी नहीं है. यहां के नेताओं में आपस में इस कदर तना-तनी है कि किसी भी योजना पर आपसी सामंजस्य बनना तो दूर योजना तक नहीं बन पाती.

श्रीमाली का कहना है कि जिले के सभी छह सांसद सिर्फ अपने सांसद निधि से ही कुछ विकास कार्य कराते तो आज यहां की तस्वीर कुछ और होती.

कांग्रेस के प्रदेश महासचिव अशोक सिंह का आरोप है कि भाजपा के सांसदों की दिलचस्पी विकास में नहीं है. यही कारण है कि पांच-पांच सांसद होने के बाद भी यहां विकास नहीं हुआ. वर्तमान में कांग्रेस के सांसद और केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने अपने विभाग के जरिए यहां बिजली परियोजना दी ओर केंद्र सरकार से विकास के लिए राशि भी दिलाई. यहां बीते 10 वर्षो से विकास पूरी तरह थमा हुआ है. ग्वालियर में जो है वह कांग्रेस काल की ही देन है.

भाजपा के वरिष्ठ नेता व ग्वालियर के पूर्व महापौर विवेक शेजवलकर का कहना है कि सब पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की छवि भारी है, और बीते 10 वर्षो में यहां हुए विकास कार्यो के कारण तस्वीर ही बदल गई है. लिहाजा आगामी चुनाव में इसका भाजपा को लाभ मिलेगा.

ग्वालियर पर चुनावी रंग पूरी तरह चढ़ चुका है और दोनों दल अपने नेताओं के विकास कार्यो का हवाला दकर वोट मांग रहे हैं. दोनों ही दल यह नहीं जानते कि यहां के कार्यकर्ताओं का उनके प्रति क्या नजरिया है.

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