NIT-श्रीनगर में गतिरोध बरकरार

श्रीनगर | समाचार डेस्क: केन्द्र एवं राज्य सरकार के हस्तक्षेप के बावजूद एनआईटी में गतिरोध जारी है. गैर-कश्मीरी छात्र एनआईटी कश्मीर को घाटी से बाहर ले जाने की मांग पर अड़े हैं. जिस पर जम्मू-कश्मीर के उप मुख्यमंत्री निर्मल सिंह ने कहा कि इसका सवाल ही नहीं उठता है. गौरतलब है कि पुलिस द्वारा मारपीट किये जाने से गैर कश्मीरी छात्र नाराज हैं तथा उके मन में भय व्याप्त है. वहीं गैर कश्मीरी छाओं के परिजन भी अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं. इस गतिरोध के बीच गैर कश्मीरी छात्र कक्षाओँ में नहीं जा रहें हैं.

कुछ गैर कश्मीरी छात्रों ने घर लौटने की मंशा जाहिर की है जिसका प्रबंध पुलिस तथा प्रसासन ने कर दिया है. जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने दावा किया है कि मामले को बढ़-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है. गैर कश्मीरी छात्र चाहते हैं कि उनकी परीक्षा बाहर के शिक्षक आकर ले. वहीं कुछ कश्मीरी शिक्षकों ने समाचार चैनलों में कहा कि उन्होंने ही बाढ़ के समय इन बच्चों को खाना-कपड़ा दिया था तथा रहने की व्यवस्था की थी. अब उन पर क्यों अविश्वास किया जा रहा है.

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संथान के श्रीनगर परिसर में दो छात्र समूहों के बीच पिछले दिनों हुई झड़प और उसके बाद पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई के बाद परिसर में तनाव शनिवार को भी व्याप्त है. इस मामले में गैर-स्थानीय छात्रों तथा सरकार के बीच की वार्ता विफल हो गई है. छात्र संस्थान को घाटी से बाहर स्थानांतरित करने की मांग कर रहे हैं, हालांकि उनकी इस मांग को सरकार ने सिरे से खारिज कर दिया है.

जम्मू एवं कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने इसे छात्रों के बीच का ‘छिटपुट’ तनाव करार देते हुए आरोप लगाया कि पूरे मामले को सांप्रदायिक घटना के रूप में पेश किया जा रहा है.

उन्होंने शुक्रवार शाम एक क्षेत्रीय टेलीविजन को दिए साक्षात्कार में कहा कि यह कोई बड़ा मुद्दा नहीं है. इसे नाहक ही बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया जा रहा है और सांप्रदायिक घटना का रंग दिया जा रहा है.

गैर-स्थानीय छात्रों की राज्य के बाहर के कॉलेजों में पढ़ने की इच्छा के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि ‘बहुत कम छात्र ऐसा चाहते हैं.’

वह शनिवार को राज्य की शीतकालीन राजधानी जम्मू से राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर पहुंचने वाली हैं.

इससे पहले शुक्रवार को उप मुख्यमंत्री निर्मल सिंह ने प्रदर्शनकारी गैर-स्थानीय छात्रों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की थी और उनसे करीब पांच घंटे तक लंबी वार्ता की थी.

सिंह के आधिकारिक आवास पर हुई इस बैठक में राज्य के शिक्षा मंत्री नईम अख्तर, केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की तीन सदस्यीय टीम, एनआईटी-श्रीनगर के निदेशक रोहित गुप्ता तथा वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी भी मौजूद थे.

निर्मल सिंह ने कहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों की अधिकांश मांगें मान ली गई हैं, लेकिन एनआईटी को घाटी से बाहर ले जाने की उनकी मांग मानने का सवाल ही पैदा नहीं होता. इस बारे में उन्हें अवगत करा दिया गया है.

स्थानीय पुलिसकर्मियों पर पक्षपातपूर्ण रवैये का आरोप लगाते हुए छात्र उनके खिलाफ भी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, जिस बारे में उप-मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले में मजिस्ट्रेट जांच की जा रही है और नतीजों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी.

निर्मल सिंह ने प्रदर्शनकारी छात्रों की इन आशंकाओं को भी दूर किया कि उनके नाम एफआईआर में दर्ज हैं. उन्होंने कहा, “एफआईआर खुला है और इसमें उनके नाम नहीं हैं.”

वहीं, एनआईटी के अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की कि कुछ घायल छात्र घर जाना चाहते हैं, जिसके इंतजाम किए गए हैं.

उल्लेखनीय है कि पूरे विवाद की शुरुआत टी20 विश्व कप के दौरान वेस्टइंडीज से मैच में भारत की हार के बाद कुछ छात्रों ने कथित तौर पर खुशियां मनाई थीं, जिसका गैर-स्थानीय छात्रों ने विरोध किया था. उन्होंने भारत के समर्थन में प्रदर्शन भी किया.

गैर-स्थानीय छात्रों का आरोप है कि जम्मू एवं कश्मीर की पुलिस ने प्रदर्शनकारी छात्रों को पीटा. इसी आधार पर वे संस्थान को घाटी से बाहर सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने की मांग कर रहे हैं.

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