FDI: भारत के दरवाजे 100% खुले

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: भारत ने अपने दरवाजे विदेशी कंपनियों के लिये पूरी तरह से खोल दिये हैं. भारत में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के आने के करीब तीन से चार सदियों बाद फिर से उसके दरवाजे विदेशी कंपनियों के पूरी तरह से खोल दिये गये हैं. अब उड्डयन तथा फार्मास्युटिकल्स तथा रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा को बढ़ा और आसान कर दिया गया है. मोदी सरकार के अस्तित्व में आने के बाद यह आर्थिक उदारीकरण तथा खुलेपन की नीति की दिशा में सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है.

दावा किया जा रहा है कि इससे देश में रोजगार बढ़ेगा. विदेशी कंपनिया तथा सरकारें मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से इसी दिन की राह देख रही थी.


हालांकि माकपा ने मोदी सरका के इस कदम का विरोध किया है. उऩका कहना है कि, “यह (एफडीआई के बारे में फैसला) भारत के हित में नहीं है और हमारी आंतरिक सुरक्षा और संप्रभुता को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हैं.” माकपा द्वारा जारी बयान में कहा गया है, “भारत-अमरीका सामरिक साझेदारी के परिणामस्वरूप मोदी सरकार ने अब हर क्षेत्र में अधिक एफडीआई की घोषणा की है.”

माकपा ने कहा, “भारत विदेशी पूंजी को अत्यधिक लाभ कमाने और उन्हें हमारी घरेलू अर्थव्यवस्था की कीमत पर अपने वैश्विक आर्थिक संकट से उबरने की छूट दे रहा है.”

आर्थिक उदारीकरण प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए सरकार ने सोमवार को रक्षा, उड्डयन, फार्मास्यूटिकल्स, खुदरा और खाद्य प्रसंस्करण जैसे उद्योगों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के नियमों को अधिक उदार बना दिया और इसके लिए सरकारी अनुमति की जरूरत घटा दी. अधिकारियों के मुताबिक, उड्डयन के क्षेत्र में अभी तक सूचीबद्ध विमानन कंपनियों में सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक की पूर्व अनुमति के बिना 49 फीसदी तक एफडीआई की अनुमति थी. अब एफडीआई की सीमा बढ़ाकर 100 फीसदी कर दी गई है और 49 फीसदी से अधिक एफडीआई के लिए सरकारी अनुमति का प्रावधान किया गया है.

फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्र में अब तक नई और पुरानी दोनों परियोजनाओं में 100 फीसदी एफडीआई की अनुमति थी, लेकिन नई परियोजनाओं के लिए पूर्व अनुमति की जरूरत नहीं थी और पुरानी परियोजनाओं के लिए सरकारी अनुमति की जरूरत थी. अब पुरानी परियोजनाओं में भी पूर्व अनुमति के बिना 74 फीसदी तक एफडीआई हो सकता है.

रक्षा क्षेत्र में बिना अनुमति के 49 फीसदी एफडीआई जारी रहेगा. लेकिन 49 फीसदी से अधिक एफडीआई वाले प्रस्तावों को मंजूरी देने में अब अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी लाने की शर्त हटा दी गई है.

एक आधिकारिक बयान में कहा गया है, “केंद्र सरकार ने आज एफडीआई नियम को अत्यधिक उदार बना दिया. इसका मकसद बड़ी संख्या में रोजगार पैदा करना है.”

बयान में कहा गया है, “विदेशी निवेश के नियमों में बदलाव का फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया. नवंबर 2015 किए गए सुधार के बाद यह दूसरा बड़ा सुधार है. अब अधिकतर क्षेत्रों में एफडीआई के लिए पूर्व अनुमति की जरूरत समाप्त हो गई है. सिर्फ कुछ नकारात्मक सूची बची रह गई है.

बयान में कहा गया है, “इन बदलावों के साथ भारत अब दुनिया की सबसे मुक्त अर्थव्यवस्था हो गई है.”

बाद में वाणिज्य और उद्योग मंत्री निर्मला सीतारमन ने संवाददाताओं से कहा, “हमने इस बात का ध्यान रखा है कि मेक इन इंडिया के लक्ष्य के साथ विदेशी निवेश को एक स्पष्ट दिशा दी जाए. हमारा मुख्य ध्यान रोजगार पैदा करने और देश को विनिर्माण हब बनाने पर है.”

000अन्य प्रमुख बिंदु :

-देश में विनिर्मित और उत्पादित प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के व्यापार के लिए (ई-कॉमर्स माध्यम सहित) सरकार की अनुमति से 100 फीसदी एफडीआई.

-डायरेक्ट-टू-होम, मोबाइल टीवी, हेड-एंड इन द स्काई और केबल नेटवर्क सहित प्रसारण सेवा उद्योग में बिना पूर्व अनुमति के 100 फीसदी एफडीआई.

-निजी सुरक्षा क्षेत्र में पहले सरकार की अनुमति से 49 फीसदी एफडीआई थी, जिसके लिए अब अनुमति की जरूरत खत्म कर दी गई. साथ ही सरकारी मंजूरी से 49 फीसदी से 74 फीसदी तक एफडीआई की अनुमति दे दी गई, जिसकी पहले अनुमति नहीं थी.

एकल ब्रांड रिटेल व्यापार क्षेत्र में अब अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी वाले उत्पादों का व्यापार करने वाली कंपनियों के लिए लोकल सोर्सिग शर्त में तीन साल तक के लिए ढील. कुछ अन्य शर्तो में पांच साल के लिए ढील.

एकल ब्रांड रिटेल के उदारीकरण से अमरीकी कंपनी एप्पल को मदद मिलेगी, जिसके दूसरे देशों में तो अपने स्टोर हैं, लेकिन भारत में सोर्सिग शर्तो के कारण उसे दूसरी रिटेल श्रंखलाओं से अपने उत्पाद बेचने पड़ते हैं.

गत दो साल में नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा कई क्षेत्रों में बड़े नीतिगत सुधार किए गए.

परिणामस्वरूप 2015-16 में देश में 55.46 अरब डॉलर का एफडीआई आया, जबकि 2013-14 में 36.04 अरब डॉलर का एफडीआई आया था. बयान में कहा गया है, “यह अब तक किसी भी एक वित्त वर्ष में आया सर्वाधिक एफडीआई है.”

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