भारत-ईरान संबंध में मजबूती के आसार

तेहरान | समाचार डेस्क: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ईरान के दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर रविवार को तेहरान पहुंचे. उन्होंने यहां भाई गंगा सिंह सभा गुरुद्वारे में मत्था टेका. उन्होंने कहा कि विदेशों में रह रहे भारतीय सभी के साथ घुल-मिल जाते हैं. मोदी के इस दौरे से दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंधों को अतिरिक्त मजबूती मिलेगी. भाई गंगा सिंह सभा गुरुद्वारे में लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “हम भारतीयों में विशेषता है कि हम सभी के साथ घुल-मिल जाते हैं.”

इसके पहले तेहरान हवाईअड्डे पर ईरान के आर्थिक एवं वित्तमंत्री अली तैयबनिया ने मोदी की अगवानी की. यहां पहुंचते ही वह सबसे पहले भाई गंगा सिंह सभा गुरुद्वारे पहुंचे और प्रार्थना की.


प्रधानमंत्री कार्यालय ने ट्वीट किया, “सांस्कृतिक जड़ों से शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तेहरान के भाई गंगा सिंह सभा गुरुद्वारे में.”

मोदी ने कहा कि नई पीढ़ियों को सिख गुरुओं के त्याग बलिदान को जानना चाहिए.

इस गुरुद्वारा की स्थापना 1941 में भाई गंगा सिंह सभा तेहरान द्वारा किया गया था.

मोदी का सोमवार को आधिकारिक स्वागत किया जाएगा, जिसके बाद वह ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली हुसेनी खामेनी और राष्ट्रपति हसन रूहानी के साथ बातचीत करेंगे.

इस दौरे के दौरान मोदी के एजेंडे में संपर्क, ऊर्जा सुरक्षा और द्विपक्षीय व्यापार शामिल है.

सोमवार को ईरान के चाबहार बंदरगाह को विकसित करने के लिए भारत, ईरान और अफगानिस्तान के बीच त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर होगा.

नई दिल्ली से प्रस्थान करने से पहले मोदी ने ट्वीट किया था, “भारत और ईरान के बीच सभ्यतागत संबंध हैं और क्षेत्र की शांति, सुरक्षा, स्थिरता और समृद्धि में दोनों देशों का साझा हित है.”

मोदी ने कहा कि संपर्क, व्यापार, निवेश, ऊर्जा साझेदारी, संस्कृति और दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने को प्राथमिकता दी जाएगी.

नरेंद्र मोदी सोमवार को तेहरान में जब ‘ईरान में भारतीय सांस्कृतिक महोत्सव’ का उद्घाटन करेंगे तो दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंधों को अतिरिक्त मजबूती मिलेगी.

ईरान के दो दिवसीय दौरे पर रविवार को रवाना हुए मोदी सोमवार को दो दिवसीय ‘भारत-ईरान दो महान सभ्यताएं : पुनरावलोकन-संभावनाएं’ नामक सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे. यह सम्मेलन तेहरान में भारतीय दूतावास, बोनयाद-ए-सादी और फरहानजिस्तान-ए-जबान-ओ-अरब-ए-फारसी के साथ मिलकर भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद द्वारा आयोजित महोत्सव का हिस्सा है.

भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के बयान के अनुसार, सम्मेलन में भारत के ईरान के साथ संबंधों, कला, संस्कृति, पुरातत्व, भाषा, साहित्य और संगीत को समेटे हुए सांस्कृतिक आदान-प्रदान की परंपरा की समीक्षा जाएगी और मजबूत साझेदारी के मद्देनजर परस्पर लाभ के लिए मिलकर काम करने के क्षेत्रों की खोज की जाएगी.

महोत्सव के उद्घाटन की एक बड़ी विशिष्ठता यह होगी कि मोदी ‘कलिला वा डिम्ना’ नामक फारसी पांडुलिपि का विमोचन करेंगे. यह पंचतंत्र और जातक कथाओं का अनुवाद है.

फारसी में नमूने के तौर पर करीब सौ किताबें होंगी जो दुर्लभ पांडुलिपियों के प्रकाशन हैं.

भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के बयान के अनुसार, भारत में फारसी विदेशी भाषा नहीं, बल्कि एक शास्त्रीय भारतीय भाषा मानी जाती है.

सम्मेलन के अलावा एक काव्य संध्या का भी आयोजन होगा. दुर्लभ फारसी पांडुलिपियां और लघुचित्र भी प्रदर्शित किए जाएंगे.

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