शेयर बाजार में उछाल क्यों?

मुंबई | समाचार डेस्क: मंगलवार दोपहर तक शेयर बाजार ने पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिये. बीएसई 26,989.39 पर तथा एनएसई 8,071.05 पर कारोबार करते देखे गयें. मंगलवार को बीएसई के सेंसेक्स में 121.84 अंकों की तथा एनएसई के निफ्टी में 43.35 अंकों की तेजी दर्ज की गई. जाहिर है कि निवेशकों को बाजार में पैसा लगाना सुरक्षित तथा फायदेमंद नजर आ रहा है. यही कारण है कि शेयरों में पैसा लगाया जा रहा है.

बाजार में चल रही तेजी का कारण बेहतर आर्थिक आंकड़ों को माना जा सकता है. उल्लेखनीय है कि शुक्रवार 29 अगस्त को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मौजूदा कारोबारी साल की प्रथम तिमाही में देश की आर्थिक विकास दर 5.7 फीसदी दर्ज की गई. यह उम्मीद से बेहतर है और पिछली नौ तिमाहियों में सर्वाधिक है.


शुक्रवार को जीडीपी के आकड़ें आने के बाद देश के वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मीडिया से कहा कि आने वाले तीन तिमाही के जीडीपी के आकड़ों में भी अच्छे रहने वाले हैं. गौर करने वाली बात यह है कि शेयर बाजार वास्तविक आर्थिक धरातल के जमीन से दूर रहता है.

इसे इस तरह से भी समझा जा सकता है कि शेयर बाजार पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ता है. शेयर बाजार के इतिहास पर गौर करने से पता चल जायेगा कि जब बाजपेई सरकार के बाद यूपीए की पहली सरकार सत्ता में आई थी तब एक वामपंथी नेता ने बयान दिया कि एनजीए सरकार द्वारा शुरु किये गये विनिवेश मंत्रालय को समाप्त कर दिया जायेगा. परिणाम स्वरूप भारतीय शेयर बाजार गिर गया था.

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री मोदी के जापान यात्रा में सोमवार को ही तय हुआ है कि जापान भारत में अगले पांच वर्षों में 35 अरब डालर का निवेश करेगा. इसी के साथ ही जापान के साथ भारत ने पांच समझौतों पर हस्ताक्षर किये हैं. इनके दायरे में स्वास्थ्य, स्वच्छ ऊर्जा, महिला विकास, सड़क और क्योटो-वाराणसी समझौता आता है.

इसी के साथ ही एसोचैम ने जापान के निवेश का स्वागत करते हुए कहा “एक वैश्विक आर्थिक नेता के रूप में जापान सहयोग और साझेदारी का विशाल अवसर उपलब्ध कराता है.” तेज रफ्तार रेल और बुलेट ट्रेन के लिए हीरक चतुर्भुज योजना के बारे में एसोचैम ने कहा, “समुचित द्विपक्षीय सहयोग से तेज रफ्तार रेल परियोजना के कार्यान्वयन में तेजी आ सकती है और इस क्षेत्र की जरूरत के मुताबिक प्रमुख उपकरणों और डब्बों की वैश्विक विनिर्माण इकाई शुरू हो सकती है.

उल्लेखनीय है कि अभी जापान ने भारत में निवेश करने की बात ही की है, अभी तक निवेश नहीं हुआ है. इसके बावजूद भारतीय शेयर बाजार उछाले मार रहा है. दोपहर करीब 12.25 बजे बंबई स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 121.84 अंकों की तेजी के साथ 26,989.39 पर और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का 50 शेयरों पर आधारित
संवेदी सूचकांक निफ्टी भी लगभग इसी वक्त 43.35 अंकों की तेजी के साथ 8,071.05 पर कारोबार करते देखे गए. दोपहर तक के कारोबार में सेंसेक्स ने 26,999.97 का ऐतिहासिक उच्च स्तर छू लिया. जबकि निफ्टी ने 8,072.20 का ऐतिहासिक ऊपरी स्तर छुआ.

सेंसेक्स और निफ्टी ने सोमवार को भी क्रमश: 26,900.30 और 8,035.00 का ऐतिहासिक ऊपरी स्तर छुआ था. सेंसेक्स सुबह 20.66 अंकों की तेजी के साथ 26,888.21 पर और निफ्टी 10.90 अंकों की तेजी के साथ 8,038.60 पर खुला.

इसके बाद दोपहर करीब 1.50 बजे बंबई स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 191.76 अंकों की तेजी के साथ 27,059.31 पर कारोबार करते देखा गया. इस दौरान नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी 68.75 अंकों की तेजी के साथ 8,096.45 पर कारोबार करते देखा गया.

जाहिर है कि मोदी सरकार की एफडीआई पर बेबाक बयान तथा निवेश के लिये बनाये गये माहौल का भारतीय शेयर बाजार में असर पड़ा है. अब देश के शेयर बाजारों में विदेशी निवेशक भी अच्छा-खासा पैसा लगा रहें हैं.

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