जम्मू-कश्मीर में भाजपा का साथी कौन?

नई दिल्ली | विशेष संवाददाता: जम्मू एवं कश्मीर में भाजपा के सामने पीपीडी या नेशनल कांफ्रेंस के साथ जाने का विकल्प खुला हुआ है. मंगलवार को आये जम्मू एवं कश्मीर विधानसभा चुनाव के नतीजे से साफ है कि भाजपा को यहां सबसे ज्यादा वोट मिले हैं. इसके बावजूद, भाजपा को बहुमत नहीं मिला है और न ही भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. विधानसभा चुनाव के पहले भाजपा जिस मिशन 44 का जिक्र कर रही ती जाहिर है कि इसके लिये उसे पीपीडी या नेशनल कांफ्रेंस का हाथ थामना पड़ेगा. भाजपा को जो भी सफलता मिली है वह उसे जम्मू से ही मिली है जबकि घाटी तथा कश्मीर में उसका खाता नहीं खुल सका है. इस विधानसभा चुनाव में भाजपा को कुल मतदान का 23 फीसदी मत मिला है. दूसरे नंबर पर 22.7 फीसदी मतो के साथ पीपी़डी है.

मोदी ने चुनाव परिणामों का स्वागत करते हुए ट्वीट किया, “जम्मू एवं कश्मीर में रिकॉर्ड मतदान लोगों का लोकतंत्र में भरोसा दिखाता है.” वहीं पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने इस सफलता का श्रेय मोदी की छह महीने की सरकार की उपलब्धियों को दिया.


प्रधानमंत्री कार्यालय के राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा, “यह भाजपा और जम्मू एवं कश्मीर के लिए क्रांतिकारी परिवर्तन है.”

नेशनल कांफ्रेंस 22.8 फीसदी मतों के साथ तीसरे स्थान पर तथा कांग्रेस 18 फीसदी मतो के साथ तौथे स्थान पर सिमट गई है. जहां तक इन मतो को विधानसभा की सीटों में तब्दील करने की बात है पीपीडी को 28, भाजपा को 25, नेशनल कांफ्रेंस को 15 तथा कांग्रेस को 12 सीटे ही मिल पाई हैं. जम्मू-कश्मीर पीपुल्स कांफ्रेंस को 2, जम्मू-कशमीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट को 1, सीपीएम को 1 तथा निर्दलीयों को 3 सीटें मिली हैं.

जाहिर है कि जम्मू-कशमीर की जनता का जनादेश स्पष्ट नहीं है इसलिये आने वाले दो-तीन दिनों में जोड़-तोड़ की राजनीति परवान चढ़ेगी इससे इंकार नहीं किया जा सकता है.

भाजपा के सामने दो विकल्प खुले हैं या कहना चाहिये कि अपना मुख्यमंत्री बनवाने के लिये दो ही रास्ते हैं. इस बात का उल्लेख करना यहां पर गैर-वाजिब न होगा कि मिशन 44 तक न पहुंच पाने वाली भाजपा के पास देश की जनता को बताने के लिये गठबंधन को स्वीकार कर अपना मुख्यमंत्री सत्तारूढ़ करवाना ही आज की तारीख में सबसे बड़ी राजनीति होगी.

पहला विकल्प जो भाजपा के पास है उसके अनुसार पीपीडी के साथ गठबंधन कर सरकार बनाना होगा. जम्मू एवं कश्मीर के विधानसभआ में पीपीजी के पास 28 तथा भाजपा के पास 25 सीटें हैं. इस तरह से भाजपा-पीपीडी गठबंधन के पास कुल 53 विधायक हो जायेंगे जो 87 सदस्यों वाली विधानसभआ में स्पष्ट बहुमत होगा. पीपीडी के साथ गठबंधन भाजपा के लिये घाटे का सौदा होगा क्योंकि इस स्थिति में दोनों के मुख्यमंत्री 3-3 साल तक रहेंगे. जाहिर है कि यह स्थिति भाजपा के चाणक्य अमित शाह को रास नहीं आने वाली है.

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी नेता महबूबा मुफ्ती ने कहा कि सुशासन प्रदान करने वाली सरकार के गठन में थोड़ा समय लगेगा. उनकी पार्टी के प्रवक्ता समीर कौल ने हालांकि कहा, “भाजपा के साथ गठबंधन को खारिज नहीं किया जा सकता.”

उन्होंने कहा, “यह खंडित जनादेश नहीं है. हालांकि यह हमारी उम्मीदों के अनुरूप भी नहीं है. जैसी हमने उम्मीद की थी, वैसा परिणाम नहीं आया है.”

भाजपा के सामने दूसरा विकल्प है कि नेशनल कांफ्रेंस तथा अन्य छोटी पार्टियों के साथ सरकार बनाने का दावा पेश करें. ऐसी स्थिति में भाजपा के 25, नेशनल कांफ्रेंस के 15 तथा अन्य दलों के 7 विधायकों को मिलाकर आकड़ा 47 को छू लेगा. इसके लिये सबसे कठिन काम है निर्दलीय तथा छोटी दोनों पार्टियों को राजी करवाना. सूत्रों से छनकर जो खबर आ रही है उसके अनुसार भाजपा, नेशनल कांफ्रेंस को केन्द्र में मंत्री का पद देकर इसके लिये तैयार कर रही है.

भाजपा महासचिव पी.मुरलीधर राव ने कहा, “जीतने से ज्यादा महत्पूर्ण यह है कि राज्य में भाजपा की स्वीकार्यता में बेहद वृद्धि हुई है.”

उन्होंने कहा, “हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण यह होगा कि हम आतंकवाद तथा अलगाववाद से किस प्रकार लडें. जम्मू एवं कश्मीर अन्य राज्यों की तरह नहीं है. हमें उपलब्ध विकल्प देखने होंगे.”

गठबंधन की संभावन पर भाजपा के जयनारायण व्यास ने कहा, “राजनीति हमेशा बृहद संभावनाओं का खेल होता है.”

नेशनल कांफ्रेंस तथा छोटे दलों के साथ गठबंधन करना भाजपा के लिये इसलिये फायदेमंद होगा कि इससे उसका मुख्यमंत्री पूरे 6 साल के लिये बनेगा तथा दिल्ली, बिहार और पश्चिम बंगाल के आने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा को पास बोलने के लिये रहेगा कि पहली बार जम्मू-कश्मीर में उसकी सरकार बनी है.

एक तीसरी स्थिति भी बन सकती है जो भाजपा के लिये नुकसानदेह होगा. वह है कि कांग्रेस, नेशनल कांफ्रेंस तथा पीपीडी का गठबंधन बन जाये जिसके विधानसभा में 52 विधायक होंगे.

इस बीच निवर्तमान मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि सरकार के गठन के लिए सबसे बढ़िया गठबंधन भाजपा तथा पीडीपी का हो सकता है.

उमर ने कहा, “मैं जनता के फैसले का सम्मान करता हूं. लेकिन जो यह सोचते थे कि हमारी हालत बेहद बुरी होगी, वे गलत साबित हुए हैं.”

राजनीति है, जिसमें सभी राजनीतिक दल अपने दांव आजमायेंगे इसके बाद वही पहलवान दंगल को जीतेगा जो सबको वश में करने वाला ‘मंत्र’ जानता है.

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