अबकी बार कश्मीर में, हिन्दू सरकार?

श्रीनगर | समाचार डेस्क: जम्मू-कश्मीर के लिये भाजपा की ओर से जितेन्द्र सिंह का नाम आगे बढ़ा दिया गया है. जितेन्द्र सिंह जम्मू के उधमपुर से 16वीं लोकसभा के सांसद हैं तथा पीएमओ के राज्य मंत्री भी हैं. उल्लेखनीय है कि 16वीं लोकसभा के चुनाव के समय भाजपा ने नारा दिया था ” बहुत हुई महंगाई की मार, अबकी बार मोदी सरकार” ठीक उसी तर्ज पर पार्टी जम्मू-कश्मीर में जितेन्द्र सिंह को मुख्यमंत्री बनाना चाहती है.

खबरों के अनुसार कश्मीर में हिन्दू मुख्यमंत्री होना भाजपा तथा उसके विचारधारा के लिये एक बड़ी जीत होगी. अभी तक छनकर जो खबरें आ रही हैं उनके अनुसार नेशनल कांफ्रेंस के साथ भाजपा राज्य के मुख्यमंत्री का पद लेने तथा उप मुख्यमंत्री एवं केन्द्र में उमर को मंत्री का पद देने के लिय बात कर ली है. खबरें यह भी हैं कि उमर अब्दुल्ला कश्मीर में जितेन्द्र सिंह को मुख्यमंत्री बनाने के लिये तैयार नहीं है.


जम्मू एवं कश्मीर में खंडित जनादेश आने के बाद सरकार बनाने को लेकर असमंजस जारी है. भारतीय जनता पार्टी ने हिंदू मुख्यमंत्री की शर्त रखी है, जिस कारण उसकी नेशनल कांफ्रेंस से समर्थन की बात नहीं बन पा रही है. दोनों पार्टियों के नेतृत्व ने गुरुवार को आपसी बैठक होने से इनकार किया. केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि जम्मू एवं कश्मीर में सरकार गठन में भारतीय जनता पार्टी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. वहीं, भाजपा महासचिव राम माधव ने कहा कि यहां भाजपा की ही सरकार बनेगी और वह यहां विभिन्न विकल्पों की तलाश में ही आए हैं.

दूसरी तरफ, सरकार बनाने को लेकर चल रही गहमागहमी के बीच भाजपा तथा नेकां ने आपस में किसी भी बैठक से इनकार किया. दोनों ही पार्टियों ने ट्वीट कर यह जानकारी दी.

गुरुवार की दोपहर यहां पहुंचे राम माधव ने संवाददाताओं से कहा, “जम्मू एवं कश्मीर में सरकार के नेतृत्व का जनादेश भाजपा को मिला है. मैं यहां विकल्प की तलाश के लिए ही आया हूं.”

उन्होंने कहा कि वह विभिन्न पार्टियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करने जा रहे हैं, लेकिन उन्होंने इस बारे में विस्तृत ब्योरा नहीं दिया.

विधानसभा चुनाव में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी को 28, नेशनल कांफ्रेंस को 15 जबकि भाजपा को 25 सीटें मिली हैं.

भाजपा सूत्रों ने कहा कि भाजपा की हिंदू मुख्यमंत्री की मांग के कारण नेकां तथा भाजपा के बीच समझौता खटाई में पड़ गया है.

सूत्रों के मुताबिक, नेकां भाजपा नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल होने के लिए तैयार है, लेकिन उसकी शर्त है कि भाजपा को हिंदू मुख्यमंत्री की मांग छोड़नी होगी.

जेटली ने जम्मू में नवनिर्वाचित भाजपा विधायकों के साथ एक बैठक में हिस्सा लेने के बाद संवाददाताओं से कहा कि पार्टी ने राज्य में बढ़िया प्रदर्शन किया है.

उन्होंने कहा कि भाजपा ने राज्य की 87 में से 76 सीटों पर चुनाव लड़ा और सर्वाधिक मत प्रतिशत पाया. जम्मू क्षेत्र में पार्टी को जबर्दस्त जनादेश मिला.

उल्लेखनीय है कि भाजपा देश के इस सीमांत उत्तरी राज्य में ‘मिशन 44+’ के साथ चुनाव में उतरी थी, मगर कामयाब नहीं हो पाई. पार्टी को हिंदू बहुल जम्मू क्षेत्र में 24 और मुस्मिल बहुल कश्मीर घाटी में एक सीट ही मिली.

जेटली ने कहा, “किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला. हमें सर्वाधिक मत मिले. पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी ने हमसे थोड़ी ही ज्यादा सीटें जीतीं.”

उन्होंने कहा कि पार्टी निर्दलीय विधायकों के संपर्क में है.

जेटली ने कहा, “राज्य में जिसकी भी सरकार बनेगी, भाजपा उसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, क्योंकि हमें सर्वाधिक मत मिले हैं.”

इससे पहले, राज्य में भाजपा के चुनाव अभियान की कमान संभालने वाले पार्टी महासचिव राम माधव ने ट्वीट कर सरकार बनाने को लेकर नेकां तथा भाजपा नेतृत्व के बीच किसी भी बैठक से इनकार किया था.

उन्होंने कहा, “दिल्ली में भाजपा नेताओं तथा नेकां नेतृत्व के बीच बैठक की खबरें निराधार हैं.”

नेकां नेता तथा निवर्तमान मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने राम माधव की बैठक को खारिज करने वाले ट्वीट को रिट्वीट किया.

मीडिया में आई खबरों के मुताबिक, बुधवार से दिल्ली प्रवास पर चल रहे उमर ने केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली तथा भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात की है.

खबरों के मुताबिक, नेकां तथा भाजपा के बीच एक समझौता हुआ है, जिसके मुताबिक आगामी छह साल के लिए राज्य में मुख्यमंत्री भाजपा का होगा, जबकि उमर केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होंगे.

इस बाबत पूछे जाने पर पीपुल्स डेमोकेट्रिक पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि पीडीपी के साथ गठबंधन बनाने को लेकर दबाव बनाने के लिए ही इस तरह की खबरें फैलाई जा रही हैं.

प्रवक्ता ने कहा, “हालांकि अभी हमने इंतजार करने का फैसला किया है.” अब आने वाला वक्त बतायेगा कि जम्मू-कश्मीर के राजनीति का ऊंट किस करवट बैठेगा तथा भाजपा पहली बार किसी हिन्दू को वहां का मुख्यमंत्री बना पायेगी कि नहीं?

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