सिहस्थ कुंभ: रात में दिन जैसा नजारा

उज्जैन | समाचार डेस्क: मध्यप्रदेश के उज्जैन में इस सदी के दूसरे सिंहस्थ कुंभ का शनिवार को समापन हो गया, मगर समापन के पहले की रात का नजारा दिन से कम नहीं था. पूरी रात यहां जन सैलाब उमड़ा रहा. श्रद्धालुओं की मौजूदगी और क्षिप्रा के तट की चहल पहल ने रात का अहसास ही नहीं होने दिया.

क्षिप्रा नदी के घाटों पर शाही स्नान की पूर्व संध्या से श्रद्धालुओं का मजमा लगने लगा था. रात 12 बजे तक श्रद्धालुओं के स्नान का दौर चलता रहा. रात 12 बजे रामघाट और दत्त अखाड़ा घाट को साधु-संतों के शाही स्नान के लिए खाली कराना शुरू कर दिया गया. इन श्रद्धालुओं को इन दोनों घाटों से अन्य घाटों पर स्नान के लिए भेजा जाने लगा.

रामघाट और दत्त अखाड़ा पर स्नान नहीं कर पाए. उन्होंने रात बारह बजे के बाद सुनहरी घाट, नृसिंह घाट व अन्य घाटों का रुख किया. इसके चलते इन घाटों पर श्रद्धालु झिलमिल रोशनी की बीच क्षिप्रा के जल में अठखेलियां करते हुए स्नान करते रहे. यह क्रम सुबह तक चलता रहा.

एक तरफ अन्य घाटों पर श्रद्धालुओं का स्नान चल रहा था तो दूसरी ओर रामघाट व दत्त अखाड़ा घाट की साफ सफाई का कार्य, आधुनिक मशीनों, चलित पंपों के द्वारा घाटों की धुलाई की गई. उसके बाद रात तीन बजे से अखाड़ों के आने का सिलसिला शुरू हो गया.

एक तरफ अखाड़ों की टोलियां क्षिप्रा की ओर बढ़ रही थीं तो दूसरी ओर देश के विभिन्न स्थानों से आए श्रद्धालु उज्जैन में पहुंच रहे थे. इन गतिविधियों ने उज्जैन में रात होने ही नहीं दी.

मंदसौर से स्नान करने आए मोहन विश्वकर्मा ने बताया कि उन्हें यहां आकर ऐसा लग ही नहीं रहा था कि रात के वक्त घाट पर स्नान कर रहे थे, यहां की चहल पहल और रोशनी ने रात का एहसास ही नहीं होने दिया. पूरी रात उन्हें ऐसे लगा, जैसे वे किसी महानगर में हों.

सतना जिले से आई सुलोचना शुक्ला ने बताया कि इतना सोचा नहीं था. उससे कहीं लाखों गुना आनंद महाकाल की नगरी उज्जैन में स्नान और दर्शन से हुआ है. उज्जैन का विहंगम दृश्य एवं श्रद्धालुओं के महासंगम से निश्चित रूप से अमृतरूपी वर्षा के रूप में महसूस किया.

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि ने भी इस आयोजन को अदभुत बताया. उन्होंने कहा कि इस सिंहस्थ कुंभ में इतिहास रचा गया है, जब एक ही समय पर दोनों संप्रदाय के अखाड़ों के साधु-संतों ने अलग-अलग घाटों पर स्नान किया.

तीसरे शाही स्नान के साथ सिंहस्थ कुंभ का समापन हो गया है, यहां आए अखाड़ों की वापसी का सिलसिला भी शुरू हो जाएगा, मगर यह आयोजन उनके लिए कई यादें छोड़ गया है.


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