लोकपाल-जोकपाल की खींचातानी

नई दिल्ली | संवाददाता:अन्ना हजारे तथा केजरीवाल के बीच लोकपाल तथा जोकपाल को लेकर तकरार बढ़ गई है. सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने फिलहाल सरकारी लोकपाल को सहमति दे दी है. वहीं आप के अरविंद केजरीवाल एण्ड पार्टी ने इसे जोकपाल करार दिया है. गौरतलब है कि कभी अन्ना हजारे के सहयोगी के रूप में अरविंद केजरीवाल ने जनलोकपाल के लिये आंदोंलन छेड़ा था. पिछले ही वर्ष अरविंद केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी का गठन कर अपनी अलग राह चुन ली थी.

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज ने शनिवार को कहा था कि भारतीय जनता पार्टी संसद में बिना बहस लोकपाल विधेयक पारित करने के लिए तैयार है. सुषमा ने ट्वीट किया था, “चयन समिति द्वारा मंजूर लोकपाल विधेयक को भाजपा संसद में बिना बहस के ही पारित कराने के लिए तैयार है.” इसके अलावा कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के लोकपाल विधेयक के लिए सर्वदलीय समर्थन मांगा गया था. राहुल ने कहा था कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण औजार साबित होने वाले राष्ट्रीय महत्व के इस विधेयक को पारित करने में सभी दल मदद करें.

हैरत की बात है कि जब सरकार तथा प्रमुख विपक्षी दल लोकपाल के लिये तौयार हो गई है उस समय अरविंद केजरीवाल एण्ड कंपनी उसकी खिलाफत कर रही है. आप तथा अरविंद केजरीवाल ने सरकारी लोकपाल पर तीन मुद्दों पर असहमति जताई है. जिसमें सीबीआई की स्वतंत्रता का सवाल है. सरकारी लोकपाल के मसौदे में सीबीआई को लोकपाल के तहत लाने का प्रस्ताव है लेकिन इसे स्वायत्ता प्रदान करने की बात नदारत है. आप का कहना है कि यदि सीबीआई को स्वायत्ता न दी जाये तो उसके अधिकारी केन्द्र सरकार के तहत ही काम करेगें. ऐसे में उनसे निष्पक्षता की उम्मीद नहीं की जा सकती है.

आप की दूसरी आपत्ति राज्यों में लोकायुक्तों की नियुक्ति को लेकर है. आप चाहता है कि जब तक राज्यों में लोकायुक्तों की नियुक्ति न की जाये तब तक भ्रष्टाचार को रोका नही जा सकता. आप तथा अरविंद केजरीवाल की तीसरी आपत्ति सिटीजन चार्टर को लेकर है. सरकारी लोकपाल में केवल ग्रुप ए के सरकारी कर्मचारियों के भ्रष्टाचार को लोकपाल के तहत लाने की बात की जा रही है. वहीं आप तथा अरविंद केजरीवाल का मानना है कि सभी सरकारी कर्मचारियों को लोकपाल के दायरें में होना चाहिये.

ज्ञात्वय रहें कि जब जनलोकपाल की मांग पर अन्ना तथा केजरीवाल ने संयुक्त रूप से आदोंलन चलाया था तब से लोकपाल के मुद्दे पर उनके रुख में बदलाव आया है. अन्ना हजारे चाहते हैं कि पहले सरकारी लोकपाल का कानून बन जाये बाद में उसमें बदलाव किया जा सकता है. अन्ना हजारे लोकपाल कानून बनने को पहनॉली प्राथमिकत्ता दे रहें हैं वहीं आप तथा अरविंद केजरीवाल पुराने मसौदे पर अड़ी हुई है. अरविंद केजरीवाल एण्ड पार्टी ने सरकारी लोकपाल को जोकपाल की संज्ञा दी है.

गौर तलब है कि सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे का रुख जहां वास्तविकत्ता के धरातल पर खड़ा है वहीं केजरीवाल एण्ड पार्टी अराजकतावादी रुझानों से अभी भी ग्रस्त है. आप का यह अराजकतावादी रुख दिल्ली विधानसभा के नतीजों के बाद भी ऊभर कर सामने आया है जिस कारण से दिल्ली में सरकार का गठन नहीं हो पा रहा है.


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *