महाराष्ट्र में भाजपा, सहयोगी कौन?

मुंबई | समाचार डेस्क: रविवार को आये महाराष्ट्र विधानसभा के नतीजे से तय है कि भाजपा की सरकार बनने जा रही है. हालांकि, भाजपा राकांपा का बिना शर्त समर्थन लेगी या अपने 25 वर्ष पुराने पार्टनर शिवसेना के साथ मिलकर मंत्रीमंडल का गठन करेगी यह साफ नहीं हुआ है. उम्मीद की जा रही है कि एक-दो दिन में इसकी घोषणा कर दी जायेगी. भाजपा संसदीय बोर्ड ने महाराष्ट्र के लिये पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह को पर्यवेक्षक बनाया है. राजनाथ सिंह के बारे में कहा जाता है कि उनसे शिवसेना की पटरी अच्छी बैठती है. इसके बावजूद, भाजपा ने अपने पत्ते पूरी तरह से नहीं कोले हैं. कयासों का दौर जारी है कि भाजपा, महाराष्ट्र में किसके समर्थन से सरकार बनाएगी. गौरतलब है कि रविवार को महाराष्ट्र में 15 अक्टूबर को विधानसभा की 288 सीटों के लिए हुए चुनाव के परिणाम आ गए.

उल्लेखनीय है कि बहुमत के आंकड़े को कोई भी पार्टी नहीं छू पाई और भारतीय जनता पार्टी प्रदेश में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है. ऐसे में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने अप्रत्याशित तौर पर भाजपा को बाहर से समर्थन देने की घोषणा कर सबको चौंका दिया है. हो सकता है भाजपा राकांपा के इस प्रस्ताव पर गौर कर सरकार बनाने की हामी भर दे.


भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने नई दिल्ली में घोषणा की कि पार्टी महाराष्ट्र में सरकार बनाएगी, लेकिन कैसे इस पर बाद में निर्णय होगा.

शाह ने मीडियाकर्मियों से कहा, “राकांपा ने भाजपा को बाहर से समर्थन की पेशकश की है. भाजपा संसदीय समिति इस मामले में अंतिम फैसला लेगी.”

सरकार बनाने के लिए शिवसेना का मुख्यमंत्री होने की शर्त पर भाजपा को समर्थन देने की बात कहने वाली शिवसेना ने शाम को संकेत दिया कि वह उपमुख्यमंत्री पद पर समझौता कर सकती है.

सेना के प्रवक्ता संजय राउत ने कहा, “यह अच्छी बात है कि भाजपा ने अच्छा प्रदर्शन किया है. हमारे पास वैसी सुविधाएं नहीं थी, जिसके माध्यम से प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों ने चुनाव प्रचार किया. अपने पुराने माध्यमों की ही बदौलत हमने चुनाव में अच्छा प्रदर्शन किया है.”

हालांकि राकांपा के फैसले पर भाजपा ने अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन राकांपा के इस फैसले ने भाजपा को सरकार बनाने के लिए अपने पुराने साथी शिवसेना की मदद की जरूरत को थोड़ा कम कर दिया है.

राकांपा के नेता प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि महाराष्ट्र को एक स्थिर सरकार की जरूरत है और इसलिए राकांपा भाजपा को समर्थन देने के लिए तैयार है.

राकांपा की तरफ से भाजपा को समर्थन की नाटकीय घोषणा ऐसे समय में सामने आई है, जब नई दिल्ली में महाराष्ट्र तथा हरियाणा में सरकार बनाने की संभावनाओं पर भाजपा नेतृत्व की बैठक हो रही है. इसी बीच भाजपा तथा शिवसेना के बीच गठबंधन को फिर से बहाल करने की भी अटकलें सामने आ रही हैं.

निर्वाचन अधिकारियों ने कहा कि 288 सीटों वाले महाराष्ट्र विधानसभा में भाजपा 122 सीटें जीतने में कामयाब रही है, जबकि बहुमत के लिए 145 सीटों की जरूरत है. वहीं, राकांपा 41 सीटें जीत चुकी है.

63 सीटें जीतने वाली शिवसेना ने पहले ही कहा कि वह सरकार बनाने में भाजपा का साथ देने के लिए तैयार है.

आडवाणी ने कहा, “मुझे उम्मीद है भाजपा और शिवसेना साथ आएंगे.”

भाजपा ने जीत का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया है.

भाजपा नेता किरीट सोमैया ने कहा, “महाराष्ट्र के लोगों ने मोदी जी के एजेंडा तथा सुशासन में विश्वास जताया है. हम लोगों के आभारी हैं. हमने जितनी सीटें जीती हैं, उसकी आधी सीटें शिवसेना ने जीती है.”

इससे पहले महाराष्ट्र के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र फड़नवीस ने मीडिया से कहा था कि शिवसेना से अभी कोई बातचीत नहीं हुई है, यदि जरूरत पड़ी तो आशा है हमारे मित्र हमें समर्थन देंगे.

शिवसेना के नेता अनिल देसाई ने कहा कि उनकी पार्टी तथा भाजपा के बीच कटुता इतिहास का विषय था.

राज ठाकरे के महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना की चुनाव में बुरी गत हुई है. चुनाव में वह मात्र एक सीट ही जीतने में कामयाब रही है, जबकि पिछली बार वह 19 सीटें जीतने में कामयाब रही थी.

फड़नवीस ने कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान जिस प्रकार शिवसेना ने मोदी और भाजपा पर निशाना साधा उससे भाजपा को बहुत दुख हुआ है.

प्रदेश में हार के लिए राकांपा ने कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है. पार्टी पर्यवेक्षक राजनाथ सिंह के भाजपा के महाराष्ट्र विधानसभा के विजयी उम्मीदवारों की बैठक में इस बात का खुलासा हो सकता है कि भाजपा किसके समर्थन से सरकार बनाएगी. इतना तय है कि पार्टी संसदीय बोर्ड ने फैसला जरूर कर लिया होगा परन्तु अपने रणनीति के चलते इसकी घोषणा नहीं की जा रही है.

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