कुपोषण क्यों नहीं बनती खबर?

रायपुर | जेके कर: देश के सबसे बड़े घराने के सपूत का वजन 70 किलो क्या कम हुआ मीडिया की खबर बन गया. शनिवार को मुकेश अंबानी के पुत्र अनंत अंबानी जब सोमनाथ के मंदिर पहुंचे तो पता चला कि उन्होंने अपना 140 किलो से घटाकर 70 किलो कर लिया है. बस फिर क्या था, यह खबर बनकर मीडिया की सुर्खियों में छा गया. जाहिर है कि हमारे यहां डाइटिंग करना खबर बन जाता है. कई बार कोई सेलीब्रिटी जब डाइटिंग करता है तो वह भी खबर बन जाता है.

हमारे देश में रोज 3000 बच्चे कुपोषण के कारण मर जाते हैं पर वह खबर नहीं बन पाती है. बच्चों में कुपोषण के कारण डायरिया, निमोनिया तथा अन्य संक्रमण से मरने के जोखिम बढ़ जाते हैं.


संयुक्त राष्ट्र संघ के कृषि तथा खाद्य संगठन के साल 2015 के रिपोर्ट के अनुसार भारत में 194.6 मिलियन लोग कुपोषण के शिकार हैं. इतना ही नहीं दुनिया में भारत में सबसे ज्यादा लोग कुपोषण के शिकार हैं. यहां तक कि जिस चीन की आबादी भारत के आबादी 1.27 अरब की तुलना में 1.39 अरब है उससे भी ज्यादा है. चीन में कुपोषण के शिकार लोगों की संख्या 133.8 मिलियन है.

ऐसा नहीं है कि भारत में कृषि उत्पाद तथा खाद्य पदार्थो की कोई कमी है. संसद में पिछले माह पेश आकड़ों के अनुसार भारत में कृषि सकल घरेलू उत्पादन का 5.08 फीसदी है तथा मछली उत्पादन सकल घरेलू उत्पादन का 1 फीसदी है.

भारत ने दुग्ध उत्पादन में 6.26 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की जबकि विश्व में दुग्ध उत्पादन 3.1 प्रतिशत की दर से बढ़ा है. वहीं, भारत में दूध की प्रति व्यक्ति उपलब्धता 1990-91 के 176 ग्राम से बढ़ाकर 2014-15 में 322 ग्राम प्रतिदिन हो गई है. जाहिर है कि यदि सभी लोगों की पहुंच 322 ग्राम दूध तक रोज होती तो वे कुपोषण का शिकार नहीं होते.

उल्लेखनीय है कि दुनिया में साल 2013 में दूध का उत्पादन 294 ग्राम प्रतिदिन हुआ था.

हाल के वर्षों में अंडा एवं मछली, दोनों के उत्पादन में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है. 2014-15 में अंडा उत्पादन 78.48 बिलियन अंडों के आसपास रहा, जबकि कुक्कुट मांस अनुमानतः 3.04 मिलियन टन रहा. 2014-15 के दौरान कुल मछली उत्पादन 10.16 मिलियन टन था. वर्ष 2015-16 की अंतिम तिमाही के दौरान भी उत्पादन में बढ़ोत्तरी का दौर देखने को मिला. यह अनुमानतः 4.79 मिलियन टन है.

हैरत की बात है कि जिस देश में कृषि उत्पादन देश के सकल घरेलू उत्पादन का 5.08 फीसदी है उस देश में 194.6 मिलियन लोग कुपोषण के शिकार हैं.

कुछेक मीडिया को छोड़कर ज्यादातर में कुपोषण कभी खबर नहीं बनती है. हां, किसान आत्महत्या पर जरूर शोर-शराबा मचाया जाता है परन्तु समस्या की जड़ तक कोई पहुंचने की कोशिश नहीं करता है.

संसद में पेश आकड़ों से इतना तो स्पष्ट है कि देश में खाद्य सामग्री की कोई कमी नहीं है, कमी है तो उनके वितरण की. अर्थात् सकल घरेलू उत्पादन के अधिकांश हिस्से पर उन घरानों का कब्जा है जिनके बच्चों की डाइटिंग खबरें बन जाया करती हैं. दूसरी तरफ गांवों में, शहरों की बस्तियों में, जंगल के गांवों के आदिवासी हैं जिनके पेट पीठ से चिपके जा रहें हैं परन्तु मीडिया के पास उसे कैद करने के लिये कैमरे नहीं हैं.

आखिरकार यथास्थिति को बदलना कोई नहीं चाहता है. सब केवल मलाई में अपनी हिस्सेदारी तय करने में मस्त हैं. इस कारण से अनंत अंबानी की डाइटिंग खबर बन जाती है.

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