छत्तीसगढ़ में बारिश में देर क्यों

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ में 20 से 25 जून तक मानसून आयेगा. पहले छत्तीसगढ़ में मानसून 10 जून तक आ जाया करता था परन्तु पिछले कई सालों से यह 20 जून के बाद ही आता है. मौसम विज्ञान के जानकारों का मानना है कि इसका कारण अल नीनो का प्रभाव तथा जलवायु में परिवर्तन है.

ऐसे में मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि छत्तीसगढ़ में मानसून आने का तारीख में अब सुधार किया जाना चाहिये. मौसम वैज्ञानिक एएसआरएएस शास्त्री का कहना है “प्रदेश में जब-जब मानसून आने में देरी होती है तब-तब बारिश के दिन भी घट जाते हैं. नतीजतन, खरीफ की फसलों पर इसका सीधा असर हो रहा है. कुछ सालों से क्लाईमेट चेंज का असर छत्तीसगढ़ में दिख रहा है.”


वहीं रायपुर स्थित मौसम विज्ञान केन्द्र के निदेशक एमएल साहू का कहना है “प्रदेश में पिछले कई सालों से मानसून 20 जून के बाद ही आता रहा है. मानसून आने की तारीख भले ही 10 जून निर्घारित है लेकिन अब इसके तिथि को रिवाइज करने की जरूरत है. क्लाईमेट चेंज के प्रभाव से इंकार नहीं किया जा सकता है.”

गौरतलब रहे कि मानसून के देर से आने के कारण खरीफ की फसल पर असर पड़ता है क्योंकि इससे बारिश होने के दिन घट जाते हैं. बारिश के दिनों में कमी होने के कारण लंबी अवधि की धान किस्मों में शफरी, मासुरी, चेप्टी, मुरमुटिया आदि संकट में हैं. इसके अलावा मोटा अनाज, दलहन और तिलहन की फसल बारिश से प्रभावित हो रही हैं.

अल नीनो या अल निनो
एल नीनो स्पैनिश भाषा का शब्द है जिसका शाब्दिक अर्थ है- छोटा बालक. इसे यह नाम पेरू के मछुआरों द्वारा बाल ईसा के नाम पर किया गया है क्योंकि इसका प्रभाव सामान्यतः क्रिसमस के आस-पास अनुभव किया जाता है.

ऊष्ण कटिबंधीय प्रशांत के भूमध्यीय क्षेत्र के समुद्र के तापमान और वायुमंडलीय परिस्थितियों में आये बदलाव के लिए उत्तरदायी समुद्री घटना को अल नीनो कहा जाता है. यह दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तट पर स्थित ईक्वाडोर और पेरु देशों के तटीय समुद्री जल में कुछ सालों के अंतराल पर घटित होती है. इससे परिणाम स्वरूप समुद्र के सतही जल का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है.

अल नीनो हवाओं के दिशा बदलने, कमजोर पड़ने तथा समुद्र के सतही जल के ताप में बढ़ोतरी की विशेष भूमिका निभाती है. अल नीनो का एक प्रभाव यह होता है कि वर्षा के प्रमुख क्षेत्र बदल जाते हैं. परिणामस्वरूप विश्व के ज्यादा वर्षा वाले क्षेत्रों में कम वर्षा और कम वर्षा वाले क्षेत्रों में ज्यादा वर्षा होने लगती है. कभी-कभी इसके विपरीत भी होता है.

जलवायु परिवर्तन

हमारी पृथ्वी का तापमान तेजी से और लगातार बढ़ रहा है. इसकी कुछ वजह प्राकृतिक है तथा ज्यादातर मानव निर्मित है. जैसे औद्योगिकरण, तेजी से बढ़ते शहरीकरण, वृक्षों को काट देना, अधिक ऊर्जा का प्रयोग करना, वाहनों की बढ़ती संख्या तथा भूमि के उपयोग में बदलाव.

पिछले कुछ वर्षो से जलवायु में परिवर्तन हो रहा है जिससे कभी ठंड अधिक पड़ती है तो कभी गर्मी अधिक पड़ती है.इसके साथ धरती के पेड़-पौधे तथा जीव-जंतु सामंजस्य नहीं बैठा पा रहें हैं. मनुष्य भी उनमें से एक है. जलवायु परिवर्तन का अर्थ किसी एक मौसम के बदलाव से नहीं है अपितु मौसम में लंबे समय तक के बदलाव को जलवायु परिवर्तन कहते हैं.

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