मनरेगा में छत्तीसगढ़ फिसड्डी

रायपुर | संवाददाता: रोजगार गारंटी योजना में छत्तीसगढ़ एक बार फिर फिसड्डी साबित हुआ है. कैग की सार्वजनिक हुई रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ में 2007 से 2012 के बीच केवल 55 प्रतिशत कार्य ही हुये हैं. इसके अलावा किये हुए कार्यों में से केवल 37.85 प्रतिशत कार्य का ही सामाजिक अंकेक्षण कराया गया है.

कैग की रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ में 4,799.07 करोड़ रुपयों के काम को स्वीकृत किया गया था, वहां केवल 2,404.51 करोड़ रुपयों के काम ही कराये जा सके.

कैग की पड़ताल से उजागार हुआ कि महासमुंद एवं कांकेर में क्रमश: 1 करोड़ व 22 लाख की रकम को मनरेगा के खाते में जमा ही नही कराया गया. इसी तरह बस्तर में 46 लाख रुपयों से 150 कंम्प्यूटर खरीदे गये परन्तु उन्हें ग्राम पंचायतों को वितरीत नही किया गया. 10 ग्राम पंचायतो में 10,041 लोगों को बेरोजगारी भत्ते का भुगतान नही किया गया. मनरेगा के खिलाफ 475 शिकायते दर्ज हुईं, जिसमें से केवल 51 शिकायतों का ही निराकरण हुआ. जशपुर जिले में मनरेगा के भुगतान की रसीदों से छेड़छाड़ पाई गई. 69.90 करोड़ रुपये तो सरपंचो के खातो में सीधे तौर पर जमा करने का मामला सामने आया है.

इस रिपोर्ट से पता चलता है कि बस्तर में 4.30 करोड़ के 154 कार्य पूर्ण ही नहीं हुए लेकिन कागजों में उसे पूरा दर्शाया गया है. दो जिलो में 902.37 करोड़ रुपये काम न होने के बावजूद अन्य एजेंसियो के पास जमा हैं. 1.69 करोड़ रुपये तो गैरकानूनी तरीके से बाउन्ड्री वाल बनाने में फूंक दिये गये.

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