मोदी सरकार के 43,200 मिनट पूरे हुए

नई दिल्ली | विशेष संवाददाता: पूर्ण बहुमत से बनी मोदी सरकार के 43,200 मिनट पूरे हो चुके हैं. लोकसभा में संख्या के मामले में स्पष्टता होने से माना जा रहा है कि मोदी की सरकार पूरे 60 माह तक चलेगी. ऐसे में 30 दिन पूरे होने से कदापि भी यह मतलब नहीं है कि उनके दिन गिने जा रहें हैं बल्कि मोदी सरकार द्वारा इतने ही दिन में किये गये कार्यो को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि आने वाले 59 माह कैसे रहने वाले हैं. अग्रेजी में एक कहावत है कि “फर्स्ट इंप्रेशन इज लास्ट इंप्रेशन”.

मोदी सरकार का अभी तक 100 दिनों का एजेंडा बनकर तैयार नहीं हुआ है लिहाजा, मोदी सरकार द्वारा अब तक किये गये कामों की बदौलत इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि आने वाले 59 माह कैसे होंगे. नरेन्द्र मोदी ने चुनाव प्रचार के समय जनता से वादा किया था कि विदेशों में भारतीयों के काले धन को वापस लाना उनके सरकार की प्राथमिकता होगी. इसके लिये मोदी सरकार ने एसआईटी का गठन कर दिया है परन्तु स्विटजरलैंड के स्थानीय कानूनों पर इस सरकार का वश नहीं है. इस कारण से कभी काले धन जमा करने वाले भारतीयों के नाम पता चल पायेंगे कि नहीं उस पर निश्चित तौर पर कुछ कहा नहीं जा सकता है.


दरअसल, कोई भी काला धन रखने वाला अपने पहचान को छुपाये रखने के लिये इसे कभी भी अपने नाम से धन नहीं रखता है. इस बात की पुष्टि स्विटडरलैंड के अधिकारी ने ही कुछ दिनों पहले की थी. ऐसे में यह कैसे पता लगाया जा सकता है कि काला धन किस भारतीय का है. दुनिया भर का काला धन वहां के बैंको में इसीलिये तो रखा जाता है कि वह सबसे सुरक्षित है. इस कारण से इसमें संदेह है कि स्विस सरकार अपने बैंको में जमा काले धन की जानकारी देगा.

इसमें सोचने की बात यह है कि यदि स्विस सरकार यह जानकारी दे देगा तो वहां जमा एक विशाल धन राशि, काली ही सही, वापस चली जायेगी. इससे स्विटजरलैंड के अर्थ व्यवस्था पर जो विपरीत प्रभाव पड़ेगा, क्या उसके लिये स्विस सरकार तैयार है. गौर करने वाली बात यह भी है कि भारत में स्पष्ट बहुमत के बल पर स्विटजरलैंड के कानूनों को बदला नहीं जा सकता है. इस कारण से काला धन वापस लाने की मुहिम परवान चढ़ पायेगी की नहीं, इसमें शक है.

यूपीए सरकार पर भ्रष्ट्राचार तथा महंगाई बढ़ाने को बढ़ावा देने का आरोप लगाकर चुनाव जीतना अलग बात है तथा सत्ता में आकर नव उदारवादी अर्थव्यवस्था के मानस पुत्र, महंगाई को रोकना दिगर बात है. इसका अहसास मोदी सरकार को जरूर हो गया होगा. इन 30 दिनों में मोदी सरकार ने महंगाई से फौरी राहत तो नहीं दिलवाई है, उलट रेल किरायों में बढ़ोतरी, चीनी के दामों को बढ़ाने वाले नीति की घोषणा तथा भविष्य में रसोई गैस के दामों में बढ़ोतरी करने का जो संकेत दिया है, उसका इंदिरा गांधी के महंगाई हटाओं के समान ही हश्र हो तो कोई आश्चर्य नहीं होगा.

अपने 30 दिनों के कार्यकाल में मोदी सरकार ने भारतीय उप महाद्वीप में अपनी राजनयिक धाक जरूर जमा ली है उसके लिये उनकी प्रशंसा करनी चाहिये. ऐसा कभी नहीं हुआ है कि इस क्षेत्र के किसी देश के शासनाध्यक्ष के शपथ ग्रहण समारोह में पड़ोस के सभी देशों के प्रमुख उपस्थित रहें हो. मोदी सरकार के पहले ही दिन जिस प्रकार से दक्षेस देशों के प्रमुख उपस्थित रहें उससे ऐसा आभास हो रहा था कि इस भारतीय उप महाद्वीप में एक बड़ी राजनीतिक हलचल का आगाज़ हो रहा है. कम से कम मोदी सरकार के प्रथम 30 दिनों के शासन काल का पहला दिन उम्मीदों भरा रहा है.

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