मोदी सरकार: टमाटर से सस्ता पेट्रोल

नई दिल्ली | विशेष संवाददाता: मोदी सरकार के दो माह के कार्यकाल में महंगाई बढ़ी है. सबसे हैरत की बात है कि “बहुत हुई महंगाई की मार, अबकी बार मोदी सरकार” का नारा देने वाले भाजपा के सत्तासीन होने के दो माह बाद देश में टमाटर जहां 80 रुपये किलो की दर से बिक रहा है वहीं पेट्रोल करीब 74 रुपये लीटर मिल रहा है. इसका मतलब यह हुआ कि टमाटर से सस्ता पेट्रोल हुआ है.

सवाल यहीं पर उठता है कि एक तो पेट्रोल के भाव दिल्ली में 7 जून को 71.51 रुपये लीटर थे वह 27 जुलाई आते-आते बढ़कर 73.6 रुपये का हो गया है. जिसका अर्थ यह होता है कि पेट्रोल के भी भाव बढ़ रहें हैं.

ताज्जुब तब होता है जब 20 रुपये किलो बिकने वाला टमाटर 80 रुपयों का हो जाये. मामला यहीं तक का नहीं है, छत्तीसगढ़ के न्यायधानी बिलासपुर में लौकी से लेकर बरबट्टी तक 40 रुपये किलो का हो गया है.

टमाटर के बढ़ते भाव की गणना करने पड़ पता चलता है कि टमाटर के दाम चार गुना बढ़ गयें हैं वहीं कई सब्जियों के दाम दो गुना बढ़ गयें हैं. जबकि जिस पेट्रोल को लेकर हो-हल्ला मचाया जाता है उसके मूल्य में 2.10 रुपये का ही इजाफा हुआ है.

अब फैसला करने की बारी सरकार की है कि जनता के क्या सबसे जरूरी है खाना या फटफटी में घूमना. बेशक, पेट्रोल एक उपयोगी वस्तु है जिसे किसी भी तरह से नकारा नहीं जा सकता है.

उधर, रविवार को मोदी सरकार के सत्ता संभालने के दो माह पूरे होने के उपलक्ष्य में केंद्रीय शहरी विकास मंत्री एम वेंकैया नायडू ने कहा कि सरकार ने अपने पहले बजट में कई विकासोन्मुखी कदम उठाए हैं और निवेश के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार किया है. उन्होंने कहा, “सरकार ने लोगों में भविष्य को लेकर विश्वास पैदा किया है. इसने देश को पेश आ रही कई समस्याओं का समाधान निकालने का प्रयास भी शुरू कर दिया है.”

नायडू ने कहा कि मोदी के शपथ ग्रहण में दक्षेस देशों के नेताओं को आमंत्रित कर प्रधानमंत्री ने अच्छा संदेश दिया. प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भी हिस्सा लिया और भारत को नव सृजित ब्रिक्स बैंक का पहला अध्यक्ष चुना गया.

मंत्री ने दावा किया कि सरकार रेलवे को मजबूत करने के प्रयास में जुटी है और लंबित परियोजनाओं पर काम करना शुरू कर दिया है.

शहरी विकास मंत्री के बयान से मोदी सरकार की प्रथमिकताओं की झलक मिलती है. बकौल वेंकैया नायडू मोदी सरकार की प्राथमिकताओं में विदेशी निवेश के लिये सकारात्मक वातावरण तैयार करना है.

इसके अलावा वेंकैया नायडू ने संवाददाताओं से कहा कि पूर्व की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सरकार के कार्यकाल में अर्थव्यवस्था पटरी से उतर गई थी और मोदी सरकार उसे वापस पटरी पर लाने में जुटी हुई है. उन्होंने पूर्व सरकार पर भारी कर्ज का बोझ लाद देने का भी आरोप लगाया.

इसी से सवाल करने का मन करता है कि मनमोहन सिंह द्वारा पटरी से उतारे गये अर्थव्यवस्था को किस प्रकार से पटरी पर लाया जा रहा है कि जनता ही डिरेल हो रही है. हालांकि, प्रधानमंत्री मोदी ने जनता से 60 माह का समय मांगा था तथा अभी केवल दो माह ही हुए हैं.

अभी भी 58 माह का समय बचा हुआ है, इसलिये जनता मोदी सरकार से जानना चाहती है कि आने वाले समय में महंगाई कम होगी या ऐसे ही बढ़ती चली जायेगी. इसमें सबसे गौर करने वाली बात यह है कि महंगाई को आकड़ों से नहीं नापा जा सकता उसे बाजार में जाकर ही महसूस किया जा सकता है.

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