शिवसेना पर प्रहार से मोदी का इंकार?

नई दिल्ली | विशेष संवाददाता: प्रधानमंत्री मोदी ने महाराष्ट्र के अपने चुनाव प्रचार में शिवसेना को बख्श दिया है. प्रधानमंत्री मोदी ने अपने चुनाव प्रचार की तोप का मुंह कांग्रेस तथा एनसीपी की ओर कर दिया है. गौरतलब है कि शिवसेना के साथ भाजपा का 25 वर्ष पुराना गठबंधन ऐन चुनाव के पहले टूट गया. जिसके लिये शिवसेना ने भाजपा पर गंभीर आरोप भी लगाये. इसके बावजूद, भाजपा के स्टार प्रचारक मोदी द्वारा यह कहना कि “कुछ समाचार पत्रों में खबर प्रकाशित की गई थी कि प्रधानमंत्री ने शिवसेना की आलोचना की है. यह बालासाहेब की अनुपस्थिति में पहला चुनाव है. मैंने शिवसेना के खिलाफ कुछ न बोलने का फैसला किया है. यह मैं उस महान नेता के प्रति सम्मान के लिए कर रहा हूं.” जाहिर सी बात है कि प्रधानमंत्री मोदी के जहन में चुनाव के परिणाम आने के बाद की परिस्थितियां उन्हें ऐसा करने से रोक रहीं है.

उल्लेखनीय है कि इस बार के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में चारों प्रमुख पार्टिया कांग्रेस, एनसीपी, भाजपा तथा शिवसेना आपसी गठबंधन के बिना स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ रहीं है. भाजपा-शिवसेना का गठबंधन जहां सीटों के सवाल पर टूट गया जिसके नेपथ्य में मुख्यमंत्री पद की महत्वकांक्षा रही है. वहीं, एनसीपी ने अपनी ओर से कांग्रेस के साथ गठबंधन खत्म करने का ऐलान कर दिया. अब एनसीपी का अगला कदम क्या होगा यह चुनाव परिणाम आने पर ही पता चल सकेगा.

ऐसा माना जा रहा है कि एनसीपी के शरद पवार ने अभी भी अपने पत्ते छुपाकर रखें हुए हैं. खात करके बिहार के उप चुनाव के नतीजे ने भाजपा को एहसास करा दिया है कि जदयू के साथ बिहार में पुराना गठबंधन टूटने के क्या परिणाम होते हैं. जाहिर सी बात है कि मोदी इसे महाराष्ट्र में दोहराना नहीं चाहेंगे. इसलिये उन्होंने शिवसेना के लिये दरवाजे खोल रखे हैं.

इधर, भाजपा के स्टार प्रचारक प्रधानमंत्री मोदी, जिनके नाम पर भाजपा यह चुनाव लड़ रही है का शिवसेना के खिलाफ कुछ न कहने की बात से साफ है कि मोदी, चुनाव परिणाम आने का इंतजार कर रहें हैं. गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र में भाजपा को सबसे ज्यादा मत मिल थे.

लोकसभा चनाव में भाजपा को 27, शिवसेना को 21, कांग्रेस को 18 तथा एनसीपी को 16 फीसदी मत मिल थे. जाहिर है कि यदि लोकसभा का ट्रेंड ही जारी रहा तो भाजपा को एक सहयोगी की जरूरत पड़ेगी. शरद पवार के कांग्रेस के साथ गठबंधन तोड़ देने के पीछे यह कारण हो सकता है.

बहरहाल, भाजपा के स्टार प्रचारक प्रधानमंत्री मोदी के इस बयान से शिवसेना के लिये नई परिस्थितियां सामने हैं जिसके बारे में उन्होंने सोचा भी नहीं था. इतना तय है कि भाजपा, शिवसेना को मुख्यमंत्री का पद देने नहीं जा रही है. प्रधानमंत्रई मोदी के इस बयान के नेपथ्य में एक रणनीति है जिसे आसानी से समझा जा सकता है.

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