माओवादियों का नही मच्छरों का डर

रायपुर | एजेंसी: छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव के लिए आए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल और अर्धसैनिक बल के जवानों को नक्सलियों से डर नही लगता है. अलबत्ता बीहड़ों में बरसात के बाद पनप रहे मच्छरों से जवान जरूर आतंकित हैं. आकार में आम मच्छरों से बड़े दिखने वाले इन मच्छरों के कारण ही बस्तर में अब तक लगभग डेढ़ दर्जन जवान अपनी जान गंवा चुके हैं.

बताया जाता है की सूबे में विधानसभा चुनाव के लिए भेजी गई 625 सीआरपीएफ और अर्धसैनिक बल की कंपनियों को बस्तर में नक्सलियों का नहीं बल्कि मच्छरों का सबसे ज्यादा डर सताने लगा है.


वर्तमान में बरसात के बाद से पूरे बस्तर में नमी का मौसम है. जंगल और आस-पास के शिविरों में नमी के चलते शाम होते ही बड़े-बड़े मच्छरों का खौफ शुरू हो जाता है. सूत्रों की मानें तो पहले से ही इन बीहड़ों में तैनात डेढ़ दर्जन जवानों की इन्हीं मच्छरों के कारण मलेरिया से मौत हो चुकी है. इसी को लेकर जवानों में संशय है. एक जवान ने नाम न प्रकाशित किए जाने की शर्त पर बताया की जंगल में अभी भी कई जवान मलेरिया से जूझ रहे हैं.

जानकार बताते हैं की सूबे में बस्तर ही एक ऐसा इलाका है जहां वाइबेक्स के अलावा फेल्सीफेरम बीमारी वाले मलेरिया की शिकायत ज्यादा मिलती है. ऐसी स्थिति में अगर सात दिनों के भीतर पीड़ितों को उचित दवा न मिले, तो उनकी मौत निश्चित हो जाती है. यही वजह है कि निर्धारित समय में सही इलाज के अभाव में यहां कई जवानों ने दम तोड़ दिया.

प्रशासन ने हालांकि, आमतौर पर बस्तर के हर शिविर में एक-दो चिकित्सकों की व्यवस्था भी की है. पुलिस की ओर से वहां उचित दवाइयां और मच्छरदानियों की आपूर्ति भी की गई है. बावजूद इसके जवानों में ऐसे मच्छरों का खौफ साफ दिखाई दे रहा है. बहरहाल, जवानों को चुनाव तक नक्सलियों से ज्यादा इन मच्छरों से ही जूझना होगा.

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