उपेक्षित है मर्रा के स्वयंभू शिव

दुर्ग | संवाददाता: छत्तीसगढ़ का पर्यटन विभाग यू तों राज्य में पर्यटन विकास के नाम पर करोड़ों रुपए हर साल व्यय करता है लेकिन फिर भी संभवनाभरे कई महत्वपूर्ण दर्शनीय स्थल उसकी नज़र से अछूते हैं. ऐसा ही एक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल राज्य के दुर्ग जिले में पाटन विधानसभा क्षेत्र के मर्रा गांव का स्वयंभू शिवलिंग है जो कि विभाग की अनदेखी का शिकार है.

लगभग सौ साल पुराना ये शिवलिंग पाटन के सिर्फ 8 किलोमीटर दूर एक विशाल तालाब के किनारे पर विराजमान है और यह जगह प्राकृतिक सौंदर्य की दृष्टि से अत्यंत मनोरम है. यहाँ पर बरगद के अनेक विशाल श्रृंखलाएं है जो की 100-200 वर्ष पुराने है.

इस शिवलिंग की देखभाल आसपास के इलाके के रहवासियों द्वारा ही की जाती है, जो कई सालों से यह मांग उठाते रहे हैं कि इसे पर्यटन विभाग द्वारा जल्द से जल्द दर्शनीय स्थलों में शामिल किया जाना चाहिए, जिससे की इस इलाके में पर्यटन उद्योग का विकास हो और इस स्वयंभू शिवलिंग मंदिर को देश-विदेश में पहचान मिले.

इस क्षेत्र के मूल रहवासी और फिलहाल भिलाई में एक वेबडिज़ाइनिंग फर्म में कार्यरत प्रशांत राजपूत का कहना है कि पर्यटन विभाग को इस बारे में बार-बार बताए जाने के बाद भी यह मनोरम स्थल उपेक्षित ही है, जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है. वे कहते हैं कि पर्यटन विभाग को इस बारे में संज्ञान लेना चाहिए और इस इलाके के विकास के लिए जल्द ही कदम उठाए जाने चाहिए.

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