गैस मूल्य बढ़ोतरी से ओएनजीसी फायदे में

नई दिल्ली | एजेंसी: केन्द्र सरकार के प्राकृतिक गैस के मूल्यों में बढ़ोतरी करने के फैसले से ओएनजीसी को 4,700 करोड़ रुपयों का मुनाफा होता दिख रहा है. इसकी पुष्ठि ओएनजीसी के अध्यक्ष ने भी की है. ओएनजीसी के अध्यक्ष डी.के. सर्राफ ने संवाददाताओं से कहा, “गैस मूल्य में हर एक डॉलर की वृद्धि से हमारी सालाना आय 4,000 करोड़ रुपये और सालाना शुद्ध लाभ 2,350 करोड़ रुपये बढ़ेगी.”

मौजूद कारोबारी साल में बचे हुए पांच महीने में नए गैस मूल्य से कंपनी को 1,950 करोड़ रुपये का फायदा होगा. कंपनी को गैस मूल्य में दो रुपये वृद्धि से हर साल करीब 4,700 करोड़ रुपये का अतिरिक्त शुद्ध लाभ होगा.

गौरतलब है कि सरकार ने शनिवार के फैसले में कहा कि एक नवंबर से गैस मूल्य ग्रॉस कैलोरिफिक वैल्यू पर आधारित होगी.

जीसीवी के फार्मूले से नेट कैलोरिफिक वैल्यू के आधार पर तय की गई मौजूदा 4.2 डॉलर प्रति यूनिट की दर बढ़कर 6.1 डॉलर हो जाएगी.

गैस मूल्य की अगली समीक्षा एक अप्रैल को होगी और सर्राफ ने इस मूल्य में आगे और वृद्धि की उम्मीद जताई.

गैस मूल्य संशोधन के लिए गठित सचिवों की समिति के समक्ष अपनी प्रस्तुति में ओएनजीसी ने कहा था कि कंपनी जिस केजी बेसिन ब्लॉक में गैस का उत्पादन करना चाहती है, उसके लाभ में आने के लिए गैस की कीमत 6-7.15 डॉलर प्रति यूनिट होनी चाहिए. जबकि पश्चिमी समुद्र तट में सात छोटे फील्ड में जिस गैस का उत्पादन करना चाहती है, उसके लाभ में आने के लिए गैस मूल्य 5.25 और 17.80 डॉलर प्रति यूनिट के बीच रखने की सिफारिश की थी.

पिछली सरकार द्वारा गठित रंगराजन समिति द्वारा दिए गए फार्मूले से गैस मूल्य 8.4 डॉलर प्रति यूनिट हो जाती.

उद्योग जगत ने जहां डीजल मूल्य को नियंत्रण मुक्त किए जाने का खुलकर स्वागत किया, वहीं नए गैस मूल्य पर विशेष प्रतिक्रिया नहीं दी, क्योंकि उद्योग जगत नया मूल्य आठ डॉलर से अधिक रखने की मांग कर रहा था.

फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, फिक्की के अध्यक्ष सिद्धार्थ बिड़ला ने एक बयान में कहा, “डीजल जैसे ईंधन उत्पाद बाजार मूल्य पर आधारित होने चाहिए. इससे सभी डीजल उपयोग में किफायत बरतने के लिए प्रोत्साहित होंगे, जो पर्यावरण अनुकूल विकास में सहायक होगा.”

पूर्वी समुद्र तट से लगे समुद्र में स्थित रिलायंस इंडस्ट्रीज के केजी बेसिन से उत्पादित होने वाली गैस के बारे में मंत्रिमंडलीय समिति ने कहा कि चूंकि इस विषय में मध्यस्थता चल रही है, इसलिए रिलायंस इंडस्ट्रीज को तब तक 4.2 डॉलर प्रति यूनिट मिलता रहेगा, जब तक कि गैस उत्पादन की कमी को दूर नहीं कर लिया जाता.

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