नक्सली कर रहे चुनाव बहिष्कार

रायपुर: छत्तीसगढ़ में नक्सलियों ने बस्तर के कई जिलों में चुनाव बहिष्कार की अपील वाले परचे छोड़े हैं.

बस्तर के सीमावर्ती प्रांत आंध्र, ओडिशा व महाराष्ट्र से युद्धकला में दक्ष नक्सलियों की आमदरफ्त भी शुरू हो चुकी है. ऐसे में अंदेशा है कि अपनी मौजूदगी का एहसास कराने के लिए नक्सली चुनाव से पहले भी किसी बड़ी वारदात को अंजाम दे सकते हैं.


नक्सलियों ने बस्तर के विभिन्न जिलों में हर वारदात के बाद घटनास्थल पर छोड़े परचों में चुनाव बहिष्कार की अपील की है. उन्होंने जीरम कांड के बाद राजनेताओं को हत्या की धमकी देना शुरू कर दिया है. हाल ही में बीजापुर और कांकेर जिले में उन्होंने विधायकों एवं अन्य जनप्रतिनिधियों को जान से मारने का ऐलान किया है.

महेंद्र कर्मा की कलशयात्रा के दौरान उनकी पत्नी देवकी कर्मा को भी नक्सली महिला संगठन द्वारा हाल ही में धमकी दी गई है. नक्सली फरमान के भय से ही बस्तर के मतदान केंद्रों में मतदाता पुनरीक्षण का कार्य संपादित नहीं हो पाया है.

पुलिस के एक आला अधिकारी ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर बताया कि जनतांत्रिक व्यवस्था के घोर विरोधी नक्सलियों की बड़ी संख्या में घुसपैठ को पुलिस प्रशासन ने गंभीरता से लिया है. ताजा हालात से राज्य शासन को अवगत कराया जा रहा है.

उन्होंने बताया कि चुनाव के दौरान नक्सलियों से कारगर ढंग से निपटने के लिए बड़ी तादाद में पुलिस व सशस्त्र बलों की तैनाती की मांग की गई है. सरकार को प्रेषित रिपोर्ट में इस बात का विशेष उल्लेख है कि सीमावर्ती इलाकों में चौकसी बढ़ाया जाना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि गुप्तचर सेवाओं को चुस्त-दुरुस्त किया जाए, ताकि नक्सली गतिविधियों की पूर्व जानकारी मिल सके.

रिपोर्ट के अनुसार, नक्सलियों ने भारी मात्रा में हथियार तथा विस्फोटक सामग्री इकट्ठा कर ली है. नक्सलियों ने घिसे-पिटे हथियारों की जगह इंसास रायफलें, हल्की मशीनगनें, मोर्टार, राकेट लांचर, क्लेमोर माइंस जैसे अत्याधुनिक प्रणालियों के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का जखीरा एकत्र कर रखा है, जिसे वे चुनाव के दौरान इस्तेमाल करने का मंसूबा बना चुके हैं.

बारिश के दिनों में पुलिस की आमदरफ्त ढीली पड़ने का फायदा उठाकर नक्सली पुलिस बल के प्रवेश को रोकने के लिए विभिन्न मार्गो पर बारूदी सुरंगें बिछा रहे हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक, हथियार चलाने में माहिर सदस्यों को आतंकवादी गतिविधियां तेज करने की कमान सौंपी गई है. घुसपैठिए नक्सली पहाड़ियों व घने जंगलों में गुप्त रूप से स्थानीय सदस्यों को गुरिल्ला वार सहित अत्याधुनिक युद्धकलाओं का प्रशिक्षण भी दे रहे हैं.

इस बीच बस्तर पुलिस एवं खुफिया एजेंसियों ने भी मुठभेड़ों के दौरान नक्सलियों से बरामद पत्रों से मोबाइल युद्ध का पदार्फाश किया है. मोबाइल युद्ध में नक्सलियों ने ग्रामीणों को हथियार बनाने की रणनीति बनाई है. उन्होंने अपने प्रभाव वाले इलाकों को बेस इलाके का नाम दिया है.

बस्तर के आईजी अरुण देव गौतम ने कहा कि नक्सली चुनाव के दौरान हमेशा से हिंसक कार्रवाईयां करते रहे हैं, जिसको लेकर पुलिस सचेत है. उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान गड़बड़ियां फैलाने के इरादे से नए नक्सलियों के प्रवेश की सूचनाएं मिली हैं, इसीलिए बस्तर में शांतिपूर्ण चुनाव निष्पादन के लिए अतिरिक्त बल तैनात करने और विभिन्न चरणों में मतदान कराए जाने का प्रस्ताव भेजा गया है.

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