नेपाल: भारतीय MNcs घाटे में

काठमांडू | समाचार डेस्क: नेपाल की उत्पादक ईकाइयों से निर्यात बंद हो जाने के कारण वहां स्थित भारतीय कंपनियों का घाटा उठाना पड़ रहा है. नेपाल में तीन महीने से जारी राजनीतिक अस्थिरता के कारण भारतीय बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लाभ में गिरावट दर्ज की गई है. समाचार पत्र काठमांडू पोस्ट के मुताबिक डाबर, यूनिलीवर और आईटीसी जैसी भारतीय कंपनियों की सहायक कंपनियां गत तीन महीने से क्षमता से काफी कम कारोबार कर रही हैं.

देश के तराई क्षेत्र के मधेशी समुदाय के नए संविधान के विरोध में किए जा रहे आंदोलन में 50 से अधिक लोगों की जान चली गई है और इसके कारण भारत-नेपाल सीमा लगभग सील कर दी गई है.


कंपनियों का उत्पाद भंडार घटता जा रहा है और उन्हें निर्यात में भी परेशानी हो रही है.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण तराई के मैदान की अधिकतर कंपनियां और खास कर मोरंग-सुनसरी और बारा-परसा औद्योगिक गलियारे की कंपनियां इस आंदोलन से प्रभावित हुई हैं.

शुक्रवार को बंबई स्टॉक एक्सचेंज में डाबर के शेयरों में करीब दो फीसदी गिरावट रही.

डाबर के करीब 75 फीसीद जूस उत्पाद नेपाल स्थित इकाइयों में बनते हैं.

तराई में आंदोलन शुरू होने के बाद से डाबर नेपाल की बीरगंज इकाई में बने उत्पादन सिर्फ घरेलू बाजार में बिक रहे हैं.

डाबर नेपाल के विपणन प्रमुख अभय गोरखाली ने नेपाली बाजार के संदर्भ में बताया, “हमारी कंपनी की स्थिति अन्य उद्योगों से अलग नहीं है.”

यूनिलीवर नेपाल की भी यही स्थिति है. यूनिलीवर नेपाल के निदेशक रवि भक्त श्रेष्ठ ने कहा, “कंपनी का लाभ एक साल पहले की समान तिमाही के मुकाबले 22 फीसदी कम रही है. यदि यही स्थिति बनी रही, तो नकारात्मक विकास भी देखना पड़ सकता है.”

यूनिलीवर नेपाल गृह देखभाल और व्यक्तिगत देखभाल उत्पादों का विनिर्माण और विपणन करती है.

आईटीसी इंडिया की सहायक कंपनी सूर्या नेपाल ने भी कहा कि वह अपनी क्षमता का सिर्फ 30 फीसदी कारोबार कर रही है.

कंपनी के शीर्ष अधिकारी ने कहा, “हमारी नीति है कि हम तैयार माल का 60 दिनों का स्टॉक रखते हैं और कंपनी को चलाने के लिए कच्चे माल का भी 60 दिनों का स्टॉक रखते हैं. अब हमें दिक्कत महसूस हो रही है.”

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