नेपाल में भूस्खलन, बिहार में बाढ़ का खतरा

पटना | एजेंसी: कोसी नदी के जलस्तर में भारी वृद्धि की आशंका के मद्देनजर बिहार सरकार ने कोसी क्षेत्र, खासकर सुपौल और मधेपुरा जिलों को सचेत कर दिया है. इसके अलावा प्रसासन द्वारा कोसी नदी के तटबंध के आसपास रहने वाले लोगों को ऊंचे स्थान पर भेजा जा रहा है.

बिहार के जल संसाधन विभाग के मंत्री विजय कुमार चौधरी ने शनिवार को बताया कि सुबह नेपाल सरकार द्वारा सूचना दी गई है कि काठमांडू से करीब 100 किलोमीटर दूर भूस्खलन हुआ है. इस कारण नेपाल की सुनकोसी नदी में पहाड़ का चट्टान गिर गया है, जिससे जल प्रवाह रुक गया है. उन्होंने बताया कि नेपाली सेना विस्फोट कर पत्थरों को हटाने की कोशिश कर रही है. चौधरी ने कहा कि विस्फोट होने के बाद कोसी के जलस्तर में वृद्धि होगी. उन्होंने कहा कि एहतियात के तौर पर सभी कदम उठाए जा रहे हैं.

गौरतलब है कि नेपाल में शनिवार को हुए एक भूस्खलन में आठ व्यक्तियों की मौत हो गई. बड़ी मात्रा में मिट्टी और चट्टानों के टूटकर नीचे आने से सुन कोशी नदी अवरुद्ध हो गई. इस भूस्खलन में एक छोटा गांव भी मलबे के नीचे दफन हो गया है और कम से कम 150 लोग लापता बताए जा रहे हैं. शनिवार तड़के लगभग दो बजे हुए भूस्खलन के बाद सिंधुपालचौक जिले में यह नदी में एक विशाल झील बन गई है. यह स्थान काठमांडू से लगभग 60 किलोमीटर दूर स्थित है.

ऐसी आशंका है कि अवरुद्ध पानी जब छोड़ा जाएगा, तो नेपाल व भारत के बिहार में भयानक बाढ़ आ सकती है. आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव ब्यास जी ने बताया कि आशंका है कि कोसी नदी का जलस्तर करीब 10 मीटर ऊंचाई तक बढ़ सकता है.

उन्होंने बताया कि सुपौल में मुख्यालय बनाकर सभी बाढ़ संभावित जिलों में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल एनडीआरएफ की टीम भेज दी गई है तथा तटबंध के आसपास बसे लोगों को हटाने का कार्य शुरू कर दिया गया है.

उल्लेखनीय है कि बिहार के लोग 18 अगस्त, 2008 को बिहार-नेपाल सीमा पर कुसहा बांध टूटने से कोसी में आई बाढ़ की त्रासदी को अभी तक भूल नहीं पाए हैं. छह वर्ष पूर्व कोसी में आई बाढ़ से बिहार के 247 गांव तबाह हो गए थे और 217 लोगों की मौत हो गई थी तथा आठ लाख से ज्यादा आबादी प्रभावित हुई थी.

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