विशेष दर्जा समाप्त कीजिए : राजन समिति

नई दिल्ली | एजेंसी: रघुराम राजन समिति ने सुझाव दिया है कि गरीब राज्यों को विशेष सहायता देने के लिए विशेष दर्जा दिए जाने की प्रथा को समाप्त कर दिया जाना चाहिए. ज्ञात्वय रहे कि राज्यों का विकास सूचकांक बनाने के लिए इस समिति का गठन किया गया था.

समिति ने इसकी जगह राज्यों की विकास जरूरतों और राज्यों के प्रदर्शन के आधार पर केंद्र से सहायता देने की प्रणाली का सुझाव दिया.

समिति ने सुझाव दिया है कि प्रत्येक राज्य को कुल राशि का 0.3 फीसदी हिस्सा दिया जाना चाहिए और राज्य की विकास जरूरतों और उसके कार्यो के प्रदर्शनों के आधार पर राज्य के लिए तय पूरी राशि दी जानी चाहिए.

वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने यहां एक बयान जारी कर समिति की इन सिफारिशों को सार्वजनिक किया.

समिति से कहा गया था कि विभिन्न कसौटियों पर राज्यों के पिछड़ेपन का पता लगाने की प्रणाली की सिफारिश करें और यह बताएं कि योजना निर्माण और केंद्र से राज्यों को पैसे आवंटित किए जाने में इन कसौटियों का किस प्रकार उपयोग किया जाए.

समिति ने प्रति व्यक्ति खपत, गरीबी अनुपात तथा अन्य कई पहलुओं पर आधारित पिछड़ेपन का ‘बहुआयामी सूचकांक’ प्रस्तावित किया है.

समिति के मुताबिक सूचकांक में 0.6 से अधिक अंक पाने वाले राज्यों को सबसे कम विकसित, 0.6 से 0.4 के बीच अंक पाने वाले राज्यों को कम विकसित और 0.4 से कम अंक पाने वाले राज्यों को सापेक्षिक रूप से विकसित माना जाएगा.

वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि सूचकांक के मुताबिक अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, मेघालय, ओडिशा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सबसे कम विकसित राज्य हैं.

मंत्री के मुताबिक प्रधानमंत्री ने वित्त मंत्रालय के तहत आर्थिक मामलों के विभाग को सिफारिशों की समीक्षा करने और जरूरी कदम उठाने का निर्देश दिया है.

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