गोरखधंधों में लिप्त हैं गौरक्षक: मोदी

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: प्रधानमंत्री मोदी ने टाउनहाल कार्यक्रम में कहा 80 फीसदी गौरक्षक गोरखधंधे में लिप्त हैं. अमरीका की तर्ज पर भारत में शुरु किये गये इस कार्यक्रम टाउनहाल के जरिये प्रधानमंत्री आम जनता से रूबरु हो रहे थे. उन्होंने देश के विकास, कृषि, अर्थव्यवस्था पर बोलते हुये गौरक्षकों पर भी बोला. प्रधानमंत्री ने उनमें से 80 फीसदी को गौरखधंधों में लिप्त बताया. उन्होंने कहा, “कुछ लोग गौरक्षक के नाम पर दुकान खोलकर बैठ गए हैं. मुझे इस पर बहुत ग़ुस्सा आता है.”

उन्होंने आगे कहा, “कुछ लोग पूरी रात असमाजिक कार्यों में लिप्त रहते हैं और दिन में गौरक्षक का चोला पहन लेते हैं. मैं राज्य सरकार से कहता हूं कि वे ऐसे लोगों का डोज़ियर बनाएं.”

मोदी इतने पर भी नहीं रूके, उन्होंने कहा है कि ऐसे गौरक्षक में से 80 फ़ीसदी लोग गोरखधंधे में लिप्त हैं.

उन्होंने गौरक्षकों से अपील की है कि वे गाय को प्लास्टिक खाने से बचाएं, ये बड़ी सेवा होगी. उन्होंने ये भी कहा कि कोई स्वयंसेवा किसी को दबाने के लिए नहीं होती.

गौरक्षकों पर निशाने साधने के साथ ही उन्होंने इशारों इशारों में मीडिया पर चुटकी ली.

मोदी अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने के बारे में बोल रहे थे और इसी दौरान उन्होंने ताज महल का ज़िक्र किया. मोदी ने कहा, “ताजमहल में निवेश किसने किया. उस समय अख़बार निकलते होंगे तो संपादकीय भी छपा होगा कि ये कैसा राजा है लोग भूखे मर रहे हैं और ये ताजमहल बना रहा है.”

उन्होंने कहा, “टीवी चैनल चलता होगा, तो सब आया होगा. मज़दूरों का हाल क्या है, कैसा हो रहा है, सब आया होगा. लेकिन वही ताजमहल आज लाखों लोगों के रोज़गार का कारण बन चुका है.”

मोदी ने मायगव मंच की दूसरी वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित टाउनहाल शैली के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, “यदि हम 30 वर्षो तक आठ प्रतिशत से अधिक आर्थिक विकास दर बनाए रखें, तो पूरी दुनिया हमारे कदमों में होगी.”

उन्होंने कहा कि मंदी से प्रभावित वैश्विक अर्थव्यवस्था में 125 करोड़ लोगों के देश के लिए 7.5 प्रतिशत विकास दर हासिल करना आसान नहीं है, ऐसे में लगातार दो वर्षो से सूखा पड़ा है.

मोदी ने कहा, “पूरी दुनिया मंदी में है और खरीदारी क्षमता काफी घट गई है. भारतीय कृषि पर भी दबाव है. ऐसी स्थिति में 7.5 प्रतिशत विकास दर हासिल करना अपने आप में बड़ी बात है और मैं इसके लिए 125 करोड़ देशवासियों को बधाई देता हूं.”

प्रधानमंत्री ने देश की मौजूदा अर्थव्यवस्था में समुचित योजना और संतुलित खर्च की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग होना चाहिए.

उन्होंने देशभर के नागरिकों के समक्ष सवाल पेश करते हुए कहा, “हम सिर्फ अपने प्राकृतिक संसाधनों के समुचित उपयोग से ही मानव संसाधन की संभावना का पूर्णरूपेण उपयोग कर सकते हैं.”

इस मौके पर प्रधानमंत्री ने उन लोगों को सम्मानित किया, जिनके सुझाव उनके मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में शामिल किए जा चुके हैं.

मोदी ने इंजीनियरिंग के छह विद्यार्थियों से भी मुलाकात की, जिन्होंने पीएमओ के नए मोबाइल एप को डिजाइन और विकसित किया था.

मोदी ने कहा कि कृषि कचरा देश की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने का एक सर्वाधिक संभावना वाला क्षेत्र है. उन्होंने कहा कि किसानों को आधुनिक सुविधाओं की ओर बढ़ना चाहिए और मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित करने का उनकी सरकार का प्रयास इसी दिशा में एक गंभीर कोशिश है.

उन्होंने कहा कि बदलते कृषि-आर्थिक परिदृश्य में किसानों को कई सारी गतिविधियों पर ध्यान देना चाहिए और इमारती लकड़ी की खेती को एक मध्यकालिक और दीर्घकालिक रणनीति के रूप में लेना चाहिए.

प्रधानमंत्री ने किसानों से आग्रह किया कि उन्हें अपनी आय बढ़ाने के लिए अपनी भूमि और श्रम के एक हिस्से को पशुपालन, मधुमक्खी पालन और मत्स्यपालन के लिए समर्पित करना चाहिए.

उन्होंने रोग रोकथाम संबंधी और सस्ते स्वास्थ्य देखभाल पर ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि सरकार स्वास्थ्य बीमा का दायरा बढ़ाने के लिए काम कर रही है.

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