‘एक आवाज’ के खिलाफ राहुल की आवाज

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: राहुल गांधी ने सांप्रदायिक हिंसा के खिलाफ विधेयक लाने की मांग पर लोकसभा में हंगामा खड़ा कर दिया. कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने लोकसभा स्पीकर से उत्तर प्रदेश में जारी सांप्रदायिक हिंसा पर चर्चा कराने की भी मांग की.

राहुल गांधी का समर्थन टीएमसी तथा आरजेडी ने किया. राहुल गांधी सांप्रदायिक हिंसा पर चर्चा की मांग को लेकर लोकसभा स्पीकर के आसंदी तक पहुंच गये.

बुधवार को लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी पार्टियों के सांसदों ने उत्तर प्रदेश के सांप्रदायिक दंगे पर चर्चा कराए जाने और सांप्रदायिक हिंसा के खिलाफ विधेयक सदन में लाने की मांग की.

कुछ मिनट बाद राहुल के नेतृत्व में कांग्रेस सांसद लोकसभा अध्यक्ष की आसंदी के पास चले गए, जिसे देखते हुए अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी.

सदन से बाहर आने के बाद राहुल ने मीडिया के सामने अध्यक्ष पर विपक्ष को न बोलने देने का आरोप लगाया.

उन्होंने कहा, “हम चर्चा की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार को चर्चा मंजूर नहीं है. संसद में ऐसा माहौल था कि सिर्फ एक व्यक्ति की आवाज सभी देशवासियों की मानी जाएगी और सिर्फ एक की आवाज सुनी जा रही है.”

भारतीय जनता पार्टी ने हालांकि, राहुल के आक्रामक रुख को उनकी ‘हताशा’ करार दिया है.

पार्टी सांसद राजीव प्रताप रूड़ी ने कहा, “यहां एक प्रक्रिया है जिसका पालन अध्यक्ष को करना पड़ता है. अध्यक्ष के खिलाफ यह आरोप लगाना कांग्रेस की हताशा को जाहिर करता है. वे किसी चर्चा में हिस्सा नहीं लेना चाहते.”

कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी के आक्रमक रुख से स्पष्ट है कि कांग्रेस तथा अन्य दल संसद में उत्तर प्रदेश में जारी सांप्रदायिकता के मुद्दे पर बहस चाहते हैं. नई लोकसभा के गठन के बाद यह पहला मौका है जब राहुल गांधी ने सदन में किसी मुद्दे पर पर जमकर आवाज उठाई तथा उसका नेतृत्व किया इतना ही नहीं बल्कि उन्होंने नारे भी लगाये.

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