प्रभु की रेल- कहीं पास, कहीं फेल

नई दिल्ली | संवाददाता: रेल बजट पर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियायें आनी शुरु हो गई है. सत्तारूढ़ भाजपा ने जहां रेल बजट को अच्छा कहा वहीं विपक्ष ने इसकी जमकर आलोचना की है. भाजपा शासित राज्यों से भी प्रतिक्रियायें आई है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि रेल बजट निवेश व सूचना-प्रौद्योगिकी पर जोर देते हुए समाज के गरीब तबके के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है. प्रधानमंत्री ने कहा कि इस साल का रेल बजट सुरेश प्रभु द्वारा पेश पिछले साल के रेल बजट पर ही आधारित है.


प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “हमने पिछले साल काफी सफलताएं देखीं और यह बजट उनमें और सुधार करने का प्रयास है.” उन्होंने कहा, “सूचना-प्रौद्योगिकी के साथ निवेश को महत्ता दी गई है.” मोदी ने कहा कि अंत्योदय एक्सप्रेस रेलगाड़ी चलाने और दो से चार दीन दयालु डिब्बे जोड़ने का प्रस्ताव सरकार की गरीबों के कल्याण की प्रतिबद्धता को दर्शाता है.

उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने रेल बजट को सराहते हुए कहा, “यह बजट विकास को गति देने वाला है. इस बजट में उत्तर प्रदेश का भी खास ख्याल रखा गया है. धार्मिक स्थलों के रेलवे स्टेशनों को पर्यटन के लिहाज से विकसित किए जाने की बात कही गई है.”

उधर, कांग्रेस के प्रवक्ता अखिलेश प्रताप सिंह ने इस रेल बजट को ‘बकवास’ बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले रेल बजट में जो वादे किए गए थे उसे पूरा करने को लेकर इस रेल बजट में कोई रोड मैप नहीं है.

सपा के नेता डा. सी.पी. राय ने मोदी सरकार के इस रेल बजट को निराशाजनक करार दिया. उन्होंने कहा, “सुरेश प्रभु ने केवल भाषण दिया और जुमले बोले. पिछले साल का लक्ष्य फेल रहा.”

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने रेल बजट के लिए रेलमंत्री सुरेश प्रभु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई दी है. बजट को लोक हितैषी बताते हुए उन्होंने कहा कि यह सुधारों वाला बजट है, जिसके परिणाम दूरगामी होंगे.

रेल बजट को यात्रियों के हित में बताते हुए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने इसकी सराहना की. उन्होंने गुरुवार को कहा कि ये दूरगामी लक्ष्य को केंद्रित कर किया गया प्रयास है जो भावी योजनाओं के लिए ठोस आधार प्रस्तुत करेगा. शाह ने कहा, “लगातार दूसरे साल हमारा रेल बजट सिर्फ लोकप्रियता के लिए नहीं है. यह ठोस आधार देने वाला है जहां से भविष्य की जनहित योजनाओं की शुरुआत होगी.”

उन्होंने कहा कि ‘दीन दयालु बोगियों’ से उन गरीब यात्रियों को राहत मिलेगी जिन्हें लंबी दूरी की गाड़ियों में सफर करने के लिए टिकट नहीं मिलते थे. अब इस तरह की दो से चार बोगियां लंबी दूरी की रेल गाड़ियों में लगाई जाएंगी जिससे उनकी अनारक्षित यात्रियों को ढोने की क्षमता बढ़ेगी.

शाह ने कहा,”लगातार दूसरे साल रेल किराए नहीं बढ़ाए गए हैं जिससे गरीबों को राहत मिलेगी.”

राष्ट्रीय लोकदल ने रेलमंत्री सुरेश प्रभु द्वारा गुरुवार को संसद में पेश किए गए रेल बजट को निराशाजनक बताया है. पार्टी ने कहा कि बजट में उत्तर प्रदेश के लिए कुछ नहीं है. रालोद के प्रदेश अध्यक्ष मुन्ना सिंह चौहान ने रेल बजट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि रेल बजट उप्र की दृष्टि से निराशाजनक है. यह बजट पुरानी रटी-रटाई बातों का संकलन है और जनता को धोखा देने वाला है, इसके जरिए जनता की उम्मीदों पर एक बार फिर पानी फिर गया है.

वाम दलों ने गुरुवार को रेल बजट को दिशाहीन बताते हुए इसकी आलोचना की. वाम दलों के नेताओं ने कहा कि यह रेलवे के निजीकरण की दिशा में प्रयास है. मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि इस रेल बजट में कुछ भी नया नहीं है और यह लोक हितकारी भी नहीं है. उन्होंने कहा कि रेल बजट से लोगों को काफी आशाएं थीं, लेकिन यह तो दिशाहीन है.

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता डी. राजा ने कहा कि रेल बजट में आशानुरूप कुछ भी नहीं है और इसमें यात्रियों की सुविधाओं और उनकी सुरक्षा के लिए कुछ भी नहीं किया गया है.

माकपा नेता मोहम्मद सलीम ने कहा, “हम लोग बजट से निराश हैं, क्योंकि इसमें जन साधारण के लिए कुछ भी नहीं है.”

उन्होंने सरकार पर यह आरोप लगाया कि वह रेलवे को निजी हाथों में सौंपने की नीति का अनुसरण कर रही है. उनका मानना है कि सरकार रेलवे का उपयोग निजी क्षेत्र की ‘फंडिंग’ के लिए कर रही है. पूरा ध्यान मार्केटिंग एवं विज्ञापन पर ही है.

तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने गुरुवार को रेल बजट पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कहा कि यह बजट उनके राज्य की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा है. हालांकि, उन्होंने बजट के कुछ प्रस्तावों का स्वागत किया. जयललिता ने कहा, “कुल मिलाकर यह बजट तमिलनाडु के लोगों की अपेक्षाओं को पूरा करने में नाकाम रहा है.”

लेकिन, उन्होंने दिल्ली-चेन्नई फ्रेट कॉरीडोर निर्माण, चेन्नई में रेल ऑटो हब बनाने और नागपट्टिनम एवं वेलंकन्नी रेलवे स्टेशनों के उन्नयन करने की घोषणा करने के लिए रेल मंत्री सुरेश प्रभु को धन्यवाद दिया. उन्होंने कहा कि खड़गपुर-विजयवाड़ा कॉरीडोर का विस्तार तमिलनाडु में तुतीकोरिन तक होना चाहिए.

लालू प्रसाद ने पटना में रेल बजट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “बजट में कुछ भी नहीं है. बजट में रोजगार के अवसर खत्म होते दिख रहे हैं. सुरक्षा की कहीं कोई चर्चा नहीं की गई है. ट्रेन को निर्धारित समय पर चलाने को लेकर भी कोई बात नहीं की गई है. यह सीधे-सीधे जनता से धोखा है.”

उन्होंने कहा कि रेल मंत्रालय पहले फायदे में था, लेकिन आज इसका दिवाला निकल गया है. उन्होंने कहा कि इस रेल बजट से कोई खास फायदा नहीं होने वाला.

वहीं, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को रेल बजट पर निराशा जताते हुए कहा कि इसमें सिर्फ औपचारिकताएं पूरी की गईं.

नीतीश ने रेलमंत्री सुरेश प्रभु द्वारा संसद में पेश रेल बजट पर कहा, “इस बजट से बिहार को निराशा मिली है. नई परियोजनाओं के लिए भी रेलवे के पास कोई योजना नहीं है और न ही ट्रेनों के समय पर चलने व स्टेशनों की साफ-सफाई को ही प्राथमिकता दी गई है.”

उन्होंने केंद्र सरकार को नसीहत देते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि सरकार खजाना खोले और रेलवे पर ध्यान दे. नीतीश ने रेलवे की हालत को दयनीय बताया और कहा कि रेल बजट में आमदनी और खर्च का कोई भी ब्योरा नहीं दिया गया है.

उन्होंने कहा, “प्रभु के बजट में ‘विजन’ की कमी साफ तौर पर दिख रही है, बजट में क्षेत्रीय संतुलन का भी ख्याल नहीं रखा गया है.”

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