माल भाड़ा से अब बढ़ेगी महंगाई

नई दिल्ली | विशेष संवाददाता: रेल का माल भाड़ा बढ़ने से महंगाई तेजी से बढ़ेगी. शुक्रवार को रेल के माल भाड़े में 6.5 फीसदी की बढ़ोतरी की घोषणा की गई है. पहले से ही महंगाई से जूझ रही जनता को इससे और संकट का सामना करना पड़ सकता है. इस बात की आशंका जताई जा रही है कि इस माल भाड़े में बढ़ोतरी से महंगाई 2 फीसदी बढ़ सकती है.

रेल का माल भाड़ा बढ़ने से सबसे ज्यादा प्रभावित कोयले के दाम होगें. देश में कोयले का परिवहन करीब 90 फीसदी रेल के माध्यम से ही होता है. एक गणना के अनुसार इससे कोयले के प्रति टन का प्रति किलोमीटर का वहन व्यय 1.34 रुपया हो जायेगा जो अभी 1.25 रुपये का पड़ता है. इस प्रकार से कोयले के दाम बढ़ जायेंगे इसमें कोई शक नहीं है.


कोयले के दामों से जुड़ा हुआ बिजली का बिल भी है चाहे उसका उपयोग घरेलू कार्यो के लिये किया जाता हो या उद्योगों में. इससे स्पष्ट है कि रेल का माल भाड़ा बढ़ने से जनता पर बिजली के बिल का बोझ बढ़ना भी अवश्यंभावी है. इसी के साथ बिजली के उपयोग से चलने वाले कल-कारखानों से उत्पादित वस्तुओं का दाम बढ़ जायेगा.

घरेलू तथा जन कार्यो में उपयोग में लाया जाने वाले सीमेंट का परिवहन, कारखाने से शहरों तक रेल के माध्यम तक से ही होता है. इसी कारण से एक सीमेंट कंपनी, श्री सीमेंट ने एक बयान में कहा है कि माल भाड़े में बढ़ोतरी होने से सीमेंट की कीमत 8 रूपए प्रति बोरी बढ़ गई है. जब सीमेंट के दाम बढ़ेंगे तो रहने के मकानों के दाम बढ़ना तय है.

इसके अलावा सीमेंट के दाम बढ़ने से पुल, रोड, सरकारी इमारतों को बनाने का खर्च भी बढ़ जायेगा. जाहिर है कि इससे सरकारी खर्च में बढ़ोतरी होगी जिससे केन्द्र तथा राज्य सरकारों के बजट पर दबाव बनेगा. इसमें दो मत नहीं है कि उसकी भी पूर्ति टैक्सों के माध्यम से जनता से वसूली जायेगी.

वैसे, रेल का माल भाड़ा बढ़ने से लोहे के परिवहन का खर्च बढ़ने वाला है जो आखिरकार उसके बढ़े हुए दामों के रूप में अस्तित्व में आ जायेगा. जिससे मकान बनाने का खर्च अलग से बढ़ जायेगा. इसे कहते हैं दुहरी मार, जिससे आम जनता को जूझना पड़ेगा.

कई खाद्य पदार्थो का परिवहन भी रेल के माध्यम से होता है जैसे चावल, गेंहू, दाल, आलू, प्याज आदि. यह भी रेल के माल भाड़े में बढ़ोतरी से अछूते नहीं रहेंगे. कुल मिलकर रेल के माल भाड़े में बढ़ोतरी महंगाई को बढ़ाने में एक उत्प्रेरक के रूप में काम करेगा.

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