पुष्प स्टील पर भूपेश के आरोप गलत-मुख्यमंत्री

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने पुष्प स्टील मामले में पूर्व विधायक भूपेश बघेल द्वारा लगाये गये आरोपों को गलत और दुर्भावना से प्रेरित बताया है. मुख्यमंत्री ने कहा है कि राज्य सरकार ने राज्य की औद्योगिक नीति के अनुपालन में राज्य में निवेश करने की इच्छुक कंपनियों के साथ एम.ओ.यू. निष्पादित किए गए. इनमें पुष्प स्टील एवं मायनिंग लिमिटेड के साथ भी वर्ष 2005 में 380 करोड़ रूपये के निवेश के लिए एम.ओ.यू. निष्पादित किया गया.

रमन सिंह ने कहा कि एम.ओ.यू. के अनुसरण में पुष्प स्टील के पक्ष में वर्ष 2005 में आयरन ओर के प्रास्पेक्टिंग लायसेंस और मायनिंग लीज की अनुशंसा भारत सरकार के अनुमोदन हेतु भेजी गई थी. राज्य सरकार के प्रस्ताव पर केन्द्रीय खान मंत्रालय का अनुमोदन प्राप्त होने पर पुष्प स्टील को वन संरक्षण अधिनियम के तहत अनुमति प्राप्त करने के लिए कहा गया था.

मुख्यमंत्री के अनुसार एम.ओ.यू. के अनुसार उद्योग स्थापित करने के लिए समुचित कार्यवाही न करने के कारण वर्ष 2007 में अन्य निवेशकों के एम.ओ.यू. निरस्तीकरण के साथ-साथ पुष्प स्टील, अक्षय इन्वेस्टमेंट, आदि कंपनियों के एम.ओ.यू. भी राज्य सरकार द्वारा रद्द कर दिये गये थे. राज्य सरकार के इस निर्णय को पुष्प स्टील एवं अक्षय इन्वेस्टमेंट ने उच्च न्यायालय, बिलासपुर में इस आधार पर चुनौती दी कि वे इस्पात संयंत्र की स्थापना हेतु भारत सरकार से पर्यावरण अनुमति न मिलने के कारण प्लांट की स्थापना का काम प्रारंभ नहीं कर सके थे.

उच्च न्यायालय, बिलासपुर ने पुष्प स्टील एवं अक्षय इन्वेस्टमेंट की याचिकाओं को स्वीकार करते हुए इनके एम.ओ.यू. को बहाल करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिये कि एम.ओ.यू. के अनुसरण में की गई कार्यवाहियां जारी रखी जाएं. इसी दौरान पुष्प स्टील ने सिलतरा औद्योगिक क्षेत्र में 30,000 टन प्रति वर्ष क्षमता वाला स्पंज आयरन प्लांट खरीद लिया जो वर्तमान में चालू है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि आयरन ओर के प्रास्पेक्टिंग लायसेंस तथा मायनिंग लीज की स्वीकृति के आदेश खान एवं खनिज अधिनियम की धारा 10(3) के तहत पारित किये जाते हैं. अभी तक पुष्प स्टील के पक्ष में आयरन ओर का प्रास्पेक्टिंग लायसेंस या मायनिंग लीज स्वीकृत नहीं किए गए हैं. पुष्प स्टील की वर्तमान में पैड-अप कैपिटल 15 करोड़ रूपये है. रमन सिंह ने कहा कि इन तथ्यों को देखते हुए यह स्पष्ट है कि भूपेश बघेल के आरोप गलत हैं और इस मामले में श्री बघेल द्वारा सी.बी.आई. जांच की मांग दुर्भावना से प्रेरित हैं.


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