बार-बार भूकंप क्यों?

हाल के दो महीनों में पूरी दुनिया में भूकंप की कुछ असामान्य गतिविधियां देखने को मिली हैं. एक के बाद एक आए शक्तिशाली भूकंप ने इक्वाडोर, जापान, म्यांमार, अफगानिस्तान और इंडोनेशिया को हिलाकर रख दिया है और दर्जनों लोगों की मौत हुई है. कई बार सुनामी के अलर्ट जारी हुए हैं. यह महज एक संयोग है या हमारे भूमंडल ने एक बार फिर भूकंप का ढंग अख्तियार कर लिया है, जिससे एक के बाद एक बड़े भूकंप आएंगे.

विशेषज्ञ भी जल्द किसी निष्कर्ष पर पहुंचने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं, लेकिन उनका कहना है कि हाल में आए इन भूकंपों का आकार और आवृत्ति अभी सामान्य दायरे में ही हैं.


अमरीकन जियोलॉजिकल सर्वे के भूभौतिकी विज्ञानी रैंडी बाल्दविन ने कहा कि यह कहना अभी कठिन है कि पृथ्वी एक और भूकंप सक्रिय अवधि से गुजर रही है.

उन्होंने कहा कि दुनियाभर में भूकंप संभावित क्षेत्रों में कभी भी बड़ा भूकंप आ सकता है, लेकिन अभी तक विभिन्न भूकंपीय क्षेत्रों के भूकंप की सक्रियता से जुड़े होने के कोई संकेत नहीं हैं.

जापान और इंडोनेशिया की ओर इंगित करते हुए विशेषज्ञों का कहना है कि भूकंप के कारण जटिल हैं. ये दोनों देश ठीक सरक्यूम-पेसिफिक सिसमिक बेल्ट पर स्थित हैं. इन दोनों देशों में बार-बार भूकंप आने की मुख्य वजह यही है.

इसका क्षेत्र अमरीका के प्रशांत महासागर तट, चीन से लगे ताईवान के क्षेत्र, फिलीपींस और न्यूजीलैंड तक है और हमारी पृथ्वी के तीन चौथाई भूकंप की ऊर्जा इसी से निकलती है. इसी वजह से इसे ‘द पेसिफिक रिंग ऑफ फायर’ नाम दिया गया है.

विनाशकारी नए भूकंपों के खिलाफ खतरे की चेतावनी जारी करना तो समय पूर्व होगा लेकिन कुछ वैज्ञानिक अधिक खतरे वाले क्षेत्रों पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत पर जोर दे रहे हैं.

चीन में चिंगहई-तिब्बत के पठार में हमेशा बहुत अधिक भूगर्भीय सक्रियता रहती है और यह क्लस्टरिंग पीरियड में प्रवेश कर रहा है और इससे सात से अधिक की तीव्रता वाला भूकंप आ सकता है. यह चेतावनी चाइना अर्थक्वेक एडमिनिस्ट्रेशन के तहत आने वाले इंस्टीट्यूट ऑफ जियोलॉजी के शोधकर्ता जू जीवेई ने दी है.

उन्होंने कहा, “हमें उस क्षेत्र में भूकंप के रुख को समझने के लिए और अधिक अध्ययन करना होगा.”

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