डाटा नहीं आटा कब सस्ता होगा?

त्वरित टिप्पणी | जेके कर: जिस देश में आटे-दाल के भाव आसमान छू रहे हों, वहां इंटरनेट के डाटा को लेकर जंग छिड़ी हुई है. देश के औद्योगिक जगत के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के खिलाड़ी मुकेश अंबानी ने रिलायंस जियो के माध्यम से देश में सबसे सस्ता डाटा देने का दावा किया है. उसके दो दिन बाद ही सरकारी क्षेत्र की टेलीकॉम कंपनी बीएसएनएल ने 1 रुपये प्रति जीबी की दर से ग्राहकों को अनलिमिटेड वायरलाइन ब्राडबैंड प्लान जल्द मुहैय्या कराने का ऐलान कर दिया है.

जंग छिड़ी है कि साइबर स्पेस में घूमने के लिये कौन कितना सस्ता ऑफर दे सकता है. दूसरी निजी डेलीकॉम कंपनियां भी इस जंग में उतर आई हैं. एयरटेल ने रिलायंस को मात देने के लिये अपनी अलग ‘डेटागिरी’ शुरु कर दी है. पूरा देश डाटा पर हो रहे खर्च तथा इंटरनेट की स्पीड पर बहस में शामिल हो गया है. सोशल मीडिया में अपने-अपने विचार रखे जा रहें हैं, जिसका कोई संपादक नहीं होता है.

यह दिगर बात है कि अवाम के पेट के स्पेस को भरने के लिये जो आटा-दाल चाहिये, उसके भाव आसमान पर हैं जिसे देखने की फुरसत किसी को नहीं है. एक तरफ किसानों को उनके उत्पादन का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है दूसरी तरफ जमाखोर प्याज, दाल, चावल को गोदामों में भर कर बाजार में नकली किल्लत पैदा कर रहे हैं.

पूरा देश ‘डेटागिरी’ में उलझ गया है. यह भी कहा जा सकता है कि ‘डेटागिरी’ में वह गुण है जो अवाम को आटे-दाल पर ‘नेतागिरी’ करने से रोक सकता है. शायद इसी कारण ‘डेटागिरी’ को भी रिलायंस जियो के साथ ही लांच कर दिया गया.

सोशल मीडिया का जमाना है. हर कोई सस्ते में अपने विचार व्यक्त करना चाहता है. आजकल जब लोग मिलते हैं तो फेसबुक, ट्विटर जो ट्रेंड कर रहा है उसी की चर्चा करते हैं. बिरला ही ऐसा मौका आता है जब आटे-दाल का भाव सोशल मीडिया पर ट्रेंड करता है.

लालू प्रसाद ने सोशल मीडिया में टिप्पणी कर सवाल पूछा है कि गरीब डाटा खायेगा कि आटा?

अभी कल ही आटे-दाल के भाव को कम करने या इसके बढ़े हुये दामों के अनुसार वेतन बढ़ाने की मांग पर अवाम के करीब 18 करोड़ लोग हड़ताल पर रहे. इस आटे-दाल की ‘नेतागिरी’ का कितना असर हुकूमत पर पड़ता है, यह बाद में जाकर पता चलेगा. लेकिन यह हड़ताल आम जनता के बीच बहस का मुद्दा बन पाया, ऐसा तो नहीं ही हुआ है. इसके उलट पिछले दो दिनों से मुकेश अंबानी के जियो के लिये रिलायंस के सेंटरों पर सिमकार्ड लेने के लिये लोग मरे जा रहे हैं.

जियो के लिये मरने की हद तक आने वाली भीड़ को यह तो सोचना ही होगा कि कम से कम आटा-दाल को डाउनलोड करने के लिये जियो का डाटा काम नहीं आयेगा. इस वायवीय दुनिया से इतर जिंदगी की हकीकत दूसरी ही है, जिससे मुंह मोड़ कर बचा नहीं जा सकता. इससे तो मुकाबला करना ही होगा.

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