1993 ब्लास्टः संजय दत्त को जेल, याकूब को फांसी

मुंबई | संवाददाता: 1993 में मुंबई में हुए बम ब्लास्ट के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने याकूब मेमन की मौत की सजा को बरकरार रखा है. जबकि फिल्म अभिनेता संजय दत्त की सजा 6 साल से घटाकर 5 साल कर दी है. इसके अलावा बम ब्लास्ट के मामले में 27 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है.

12 मार्च 1993 को मुंबई में सिलसलेवार ढंग से हुए 13 बम विस्फोटों में 250 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी और 700 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे. सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इस मामले में फैसला सुनाते हुये कहा कि भगोड़े आरोपियों के बाद याकूब मेमन मुंबई बम ब्लास्ट में सबसे बड़ा दोषी है, लिहाजा टाडा अदालत से मिली उसकी मौत की सजा बरककार रखी जाती है.


जस्टिस पी. सदाशिवम और जस्टिस बी. एस. चौहान की बेंच ने 10 दोषियों की सजा उम्रकैद में तब्दील करते हुए कहा कि ये लोग गरीब और अनपढ़ हैं और साजिश के मोहरे भर थे. इससे पहले टाडा अदालत ने कुल 12 लोगों को मौत की सजा सुनाई थी, लेकिन एक की मौत जेल में ही हो चुकी है.

टाडा अदालत ने संजय दत्त को गैरकानूनी ढंग से 9एमएम की पिस्टल और एके-56 रखने के अपराध में छह साल के कैद की सजा सुनाई थी. संजय दत्त ने अपनी शादी और हाल में हुए बच्चों का हवाला देकर सुप्रीम कोर्ट से राहत की अपील की थी, जिसे ठुकराते हुए अदालत ने कहा कि उन पर साबित हुए आरोप ऐसे नहीं हैं कि उन्हें खुला छोड़ दिया जाए. अदालत ने उन्हें 6 साल के बजाये पांच साल के जेल की सजा सुनाई.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि टाडा कोर्ट ने कानून सम्मत प्रक्रिया का पूरी तरह से पालन किया है, इसलिए प्रक्रिया के आधार पर सजा को चुनौती दी गईं याचिकाएं स्वीकार नहीं होंगी। बेंच ने उन्हीं याचिकाओं पर फैसला दिया जिनमें सबूत के आधार पर चुनौती दी गई थी.

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