स्पॉट फिक्सिंग पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुरक्षित

नई दिल्ली | एजेंसी: सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में खेल रहे कुछ खिलाड़ियों और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के प्रमुख एन. श्रीनिवासन से जुड़े स्पॉट फिक्सिंग और सट्टेबाजी मामले की जांच के लिए समिति गठित करने के मामले को लेकर अपना फैसला सुरक्षित रखा.

न्यायाधीश एके पटनायक की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह बताए जाने के बाद कि न्यायधीश मुकुल मुद्गल ने इस समिति की अध्यक्षता की इच्छा जाहिर की है. इसके बाद न्यायालय ने अपना फैसला सुरक्षित रखने की बात कही. मुद्गल ने खिलाड़ियों और श्रीनिवासन के खिलाफ जांच की इच्छा जाहिर की है.


सीनियर काउंसिल गोपाल सुब्रमण्यम ने अदालत को बताया कि मुद्गल ने जांच दल की अगुवाई स्वीकार करते हुए यह भी कहा है कि वह चाहते हैं कि इस काम में सीबीआई के पूर्व निदेशक एमएल शर्मा और दो पुलिसकर्मी उनकी मदद करें. एक पुलिसकर्मी चेन्नई पुलिस और एक दिल्ली पुलिस का है.

सर्वोच्च न्यायालय ने अपनी पिछली सुनवाई के दौरान यह जानना चाहा था कि क्या मुद्गल इस नई जांच समिति का प्रमुख बनने को तैयार हैं.

बीसीसीआई ने हालांकि इस जांच समिति का विरोध किया है. बीसीसीआई वकील की दलील है कि मुद्गल की जांच के आधार पर ही श्रीनिवासन और खिलाड़ियों के खिलाफ आरोप तय किए गए हैं, ऐसे में अगर इस मामले की नए सिरे से जांच होती है तो वह किसी अन्य व्यक्ति द्वारा की जानी चाहिए.

न्यायाधीश पटनायक बीसीसीआई की इस दलील से प्रभावित नहीं दिखे और कहा कि इसे लेकर न्यायालय ही कोई फैसला करेगा और फिलहाल अपना फैसला सुरक्षित रखते हैं.

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