सहारा को अंतिम मोहलत

नई दिल्ली | एजेंसी: सर्वोच्य न्यायालय ने सहारा समूह को धन जुटाने के लिये अंतिम मोहलत दी है. सर्वोच्च न्यायालय ने सहारा समूह को सोमवार को सुब्रत रॉय और दो निदेशकों को हिरासत से मुक्त कराने के लिए 10 हजार करोड़ रुपये जुटाने की अंतिम मोहलत दी. इस राशि का उपयोग निवेशकों को आंशिक भुगतान करने के लिए किया जाएगा, जिसे समूह की कंपनियों ने 2008-09 में वैकल्पिक रूप से पूर्ण परिवर्तनीय डिबेंचर के जरिए निवेशकों से जुटाई थी.

न्यायमूर्ति टी.एस. ठाकुर, न्यायमूर्ति अनिल आर. दवे और न्यायमूर्ति ए.के. सीकरी की पीठ ने सहारा को कुछ और संपत्ति देश में बेचने की अनुमति भी दी, ताकि हांगकांग की कंपनी नुआम फायनेंशियल कंसल्टेंट्स से मिलने वाली राशि और अदालत के आदेश के मुताबिक किए जाने वाले भुगतान के बीच के फासले की पूर्ति की जा सके.


नुआम फायनेंशियल सर्विसिस से मिलने वाली राशि के बाद भी कंपनी को 650 करोड़ रुपये जुटाने होंगे और उसके लिए सहारा को देश भर में मौजूद उसकी 10 संपत्तियों को बेचने की अनुमति मिली है. यदि इन 10 संपत्तियों को बेचने के बाद भी राशि पूरी नहीं होती है, तो अदालत ने सहारा को उसके एंबी वैली संपत्ति को भी बेचने की अनुमति दी है.

अदालत ने 26 मार्च, 2014 के आदेश का पालन करने के लिए सभी तरह के विकल्पों की तलाश करने के लिए सहारा को तीन महीने का समय दिया. अदालत ने कहा कि यदि सहारा 5,000 करोड़ रुपये नकद और इतनी ही राशि की बैंक गारंटी जुटा पाने में सफल नहीं होगा, तो सहारा की संपत्ति को बेचकर उतनी राशि जुटाने के लिए सरकारी प्रबंधनकर्ता नियुक्त किया जाएगा.

अदालत ने मिराक कैपिटल को भी लंदन और न्यूयार्क में स्थित सहारा की तीन संपत्तियों को खरीदने के लिए ऑफर पेश करने की अनुमति दी. अदालत ने कहा कि यदि जरूरत हुई तो बाद में मिराक के प्रस्ताव पर विचार किया जा सकता है.

सोमवार के आदेश के बाद सुब्रत रॉय और सहारा समूह के दो निदेशक -रवि शंकर दूबे और अशोक राय चौधरी- तिहाड़ जेल के सम्मेलन कक्ष में रह सकेंगे और धन जुटाने के लिए लैपटॉप सहित अन्य संचार साधनों का इस्तेमाल कर सकेंगे.

सर्वोच्च न्यायालय ने 30 अगस्त, 2012 को सहारा की दो कंपनियों -एसआईआरईसीएल और एसएचआईसीएल- को निर्देश दिया था कि वे निवेशकों को 17,400 करोड़ रुपये 15 फीसदी ब्याज के साथ वापस करें, जो उन कंपनियों ने 2008-09 में ओएफसीडी के जरिए जुटाई थी. बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड के मुताबिक यह राशि दोगुनी से भी अधिक हो चुकी है.

सर्वोच्च न्यायालय ने 26 मार्च 2014 के आदेश में सहारा को 10 हजार करोड़ रुपये जमा करने के लिए कहा था. इसमें से 5,000 करोड़ रुपये अदालत में नकद जमा किया जाना है और शेष 5000 करोड़ रुपये किसी राष्ट्रीयकृत बैंक की बैंक गारंटी के रूप में जमा किया जाना है, जो सेबी के नाम देय होना चाहिए.

सुब्रत रॉय और दो निदेशकों की अंतरिम जमानत की शर्त पूरी होने पर 5,000 करोड़ रुपये की नकदी सेबी को जारी कर दी जाएगी.

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