छग 4 हफ्तों में लापता बच्चे खोजें: SC

नई दिल्ली | संवाददाता: सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ को चार हफ्तों में लापता बच्चों का पता लगाने कहा है. गुरुवार को बचपन बचाओं आंदोलन की याचिका पर सुनवाई जारी रखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार को निर्देश दिया है कि चार हफ्तों के भीतर छत्तीसगढ़ के लापता बच्चों का पता लगाये. वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने बिपार सरकार की इस बात के लिये प्रशंसा की है कि उन्होंने एक सप्ताह के भीतर 169 लापता बच्चों को ढ़ूढ़ निकाला है.

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को निर्देश दिया है कि शेष 464 बच्चों को तीन सप्ताह के भीतर खोजा जाये. इससे पहले, न्यायालय ने बिहार और छत्तीसगढ राज्यों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों को गुमशुदा बच्चों का पता लगाने के लिये की गई कार्रवाई के बारे में स्पष्टीकरण देने के लिये तलब किया था.

गौरतलब है कि पिछली सुनवाई में छत्तीसगढ़ के कार्यवाहक मुख्य सचिव डी.एस मिश्रा और डीजीपी ए.एन. उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि राज्य सरकार ने निजी प्लेसमेंट एजेंसियों को नियंत्रित करने के लिए कानून बनाया है. इसके तहत 17 निजी प्लेसमेंट एजेंसियों की गतिविधियां रोक दी गई हैं. 380 थानों में बाल कल्याण अधिकारियों की तैनाती की गई है. विभिन्न विभागों के सहयोग से मानव तस्करी की गतिविधियों को रोकने की कोशिश हो रही है.

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में मानव तस्करी की लगातार शिकायतों के बीच प्रमुख लोकायुक्त शंभूनाथ श्रीवास्तव ने सितंबर माह में ही कहा था कि जेलों में बंद कैदी अपने साथियों से मानव तस्करी करा रहे हैं. उन्होंने बताया था कि लोक आयोग के पास छत्तीसगढ़ के 6,525 बच्चों के लापता होने की शिकायत आई है. अधिकांश मामलों में बच्चों से भीख मंगवाया जा रहा है. श्रीवास्तव ने कहा था कि इसके लिए रेलवे स्टेशन को ठिकाना बनाया गया है. इसे रोकने में जीआरपी कमजोर नजर आती है. मानव तस्करी के गैंग को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है.

प्रमुख लोकायुक्त ने मानव तस्करी रोकने के उपायों को लेकर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए यह बात कही थी. पिछले 10-15 वर्षो से यह अपराध कुछ संगठित संस्थाओं द्वारा सुनियोजित ढंग से किया जा रहा है. यह विषय इतना गंभीर है कि स्वयं सर्वोच्च न्यायालय इसकी निगरानी कर रहा है. उन्होंने बताया था कि छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा में मानव व्यापार की शिकायतें ज्यादा आ रही हैं. इन तीनों राज्यों में सरकार और प्रशासन निश्चित रूप से इसकी रोकथाम के लिए लगातार सजग और सतर्क है.

ज्ञात रहे कि महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री कृष्णा तीरथ ने 6 मार्च को राज्य सभा में एक प्रश्न के उत्तर में लिखित जानकारी देते हुए बताया था कि पिछले तीन वर्षे में देश में दो लाख 36 हजार 14 बच्चे लापता हुए जिनमें से 75808 बच्चो की अब तक तलाश नहीं की जा सकी है. तीरथ ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि वर्ष 2009 से लेकर 2011 तक देश में कुल मिलाकर दो लाख 36 हजार 14 बच्चे गायब हो गए. उनमें से एक लाख 60 हजार 206 बच्चो की तलाश कर ली गई है जबकि 75808 बच्चे अभी भी लापता हैं. मंत्री कृष्णा तारथ ने अपने लिखित जवाब में बताया था कि आदिवासी बहुल छत्तीसगढ़ में कुल 11536 बच्चे गायब हुए जिनमे से 2986 बच्चों के बारे में अब तक पता नहीं चल सका है.

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