स्व-सहायता समूह के उत्पाद ऑनलाइन

भोपाल | एजेंसी: मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में स्व-सहायता समूह द्वारा तैयार होने वाले आचार से लेकर साबुन तक को दुनिया के बाजार में पहुंचाने की कोशिशें तेज हो गई हैं. पहले प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में स्व-सहायता समूह द्वारा निर्मित उत्पादों के लिए आजीविका बाजार खोले जाएंगे. फिर इन उत्पादों की प्रदेश से बाहर ऑनलाईन पहुंच बनाई जाएगी.

ग्रामीण इलाकों के लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने का जरिया बन गए हैं, स्व-सहायता समूह. राज्य में 70 हजार से ज्यादा स्व-सहायता समूह हैं, जो दैनिक उपयोग की वस्तुओं का निर्माण करते हैं. इसमें हजारों लोग अपनी सेवाएं दे रहे हैं. ये समूह ग्रामीण इलाकों में उत्पादन करते हैं. इस वजह से उन्हें बाजार आसानी से नहीं मिल पाता है.


इन समूहों को प्रोत्साहित करने के साथ इनके द्वारा तैयार किए जाने वाले उत्पादों को आम आदमी तक पहुंचाया जा सके, इसके लिए आजीविका मिशन ने जिला मुख्यालयों में आजीविका बाजार शुरू करने की योजना बनाई है, जिससे इन समूहों की आय भी बढ़ सकेगी.

सूत्रों का कहना है कि आजीविका बाजार में स्व-सहायता समूह द्वारा तैयार किए जाने वाले उत्पादों में आचार से लेकर साबुन तक और हस्त निर्मित सामग्री व अन्य उत्पाद भी उपलब्ध रहेंगे. यह विपणन के आधुनिक तरीके का हिस्सा है. प्रदेश का पहला आजीविका बाजार राजधानी भोपाल में स्थापित किया जा रहा है.

राज्य के ग्रामीण आजीविका मिशन के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एल. एम. बेलवाल का कहना है कि बहुत बड़ा वर्ग इस बात से वाकिफ नहीं है कि स्व-सहायता समूह द्वारा बनाए जाने वाले दैनिक उपयोग के उत्पाद गुणवत्तापूर्ण होते हैं, इसके लिए विपणन के आधुनिक तरीकों को अपनाना जरूरी है, ताकि इन उत्पादों को बड़ा बाजार मिल सके.

उनका कहना है कि इस प्रयास से न केवल समूहों की आय का जरिया बढ़ेगा, बल्कि उनके अस्तित्व पर कोई खतरा भी नहीं आएगा. इसके लिए आजीविका बाजार की प्रदेश के बाहर भी श्रंखला बनाई जाएगी और ऑनलाइन विक्रय के जरिए इन उत्पादों को दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाया जाएगा.

ऐसा लगता है कि स्व-सहायता समूह के उत्पादों को दुनिया में ऑनलाइन बेचने का विचार पिछले दिनों चीन से व्यापार प्रतिनिधियों के राज्य के प्रवास पर आने के बाद आया है. इन समूहों के कई सदस्यों ने स्व-सहायता समूहों द्वारा उत्पादित सामग्री को पसंद किया और खरीदा भी था.

देश में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने जून 2011 में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत आजीविका परियोजना शुरू की थी. इसमें निवेश के लिए विश्व बैंक से मदद का भी प्रावधान है.

यहां बता दें कि राज्य के 25 जिलों में विकासखंड स्तर पर आजीविका फ्रेश शुरू किए गए हैं, जहां सब्जी और फल बिकता है. इसके बेहतर नतीजों ने मिशन को आगे बढ़ने का साहस दिया है.

इस कोशिश के जरिए मिशन का लक्ष्य उन ग्रामीण गरीबों को प्रभावकारी अवसर उपलब्ध कराना है जो आर्थिक संकट के दौर से गुजरते हैं. यह प्रयास उन्हें अवसर तो देगा ही साथ ही उनकी आर्थिक स्थिति भी सुधर सकेगी.

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