कुछ ट्राइबल लॉ संविधान का उल्लंघन

अगरतला | समाचार डेस्क: जस्टिस डीके गुप्ता ने कहा कि पूर्वोत्तर के कुछ प्रथागत कानून संविधान का उल्लंघन करते हैं. उन्होंने कहा पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों में इस्तेमाल किए जा रहे आदिवासी समुदायों के प्रथागत कानून भारतीय संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन करते हैं. छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बनने जा रहे गुप्ता ने कहा, “जनजाति समुदाय के नेता कभी-कभी हत्या, दुष्कर्म व अन्य संगीन अपराधों के लिए प्रथागत कानूनों का इस्तेमाल करते हैं. इन पारंपरिक प्रथागत कानूनों को संहिताबद्ध किया जाना चाहिए.”

यहां बुधवार को संवाददाताओं से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा, “गंभीर विवाद व अपराधों का निपटारा गैर संवैधानिक निकायों द्वारा नहीं किया जाना चाहिए.”

पूर्वोत्तर राज्यों में 28 फीसदी आबादी जनजाति समुदायों की है. 138 जनजातीय समुदायों की जीवनशैली, खानपान, वेशभूषा व पारंपरिक रीति रिवाज एक-दूसरे से अलग हैं.

भारत के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति टी.एस.ठाकुर के सुझाव का समर्थन करते हुए गुप्ता ने कहा कि लंबित मामलों का निपटारा करने के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को नियुक्त करना चाहिए.

उन्होंने कहा, “जब त्रिपुरा में साल 2013 में एक अलग उच्च न्यायालय की स्थापना की गई, उस वक्त उच्च न्यायालय में 6,615 मामले लंबित थे (मार्च 2013 तक त्रिपुरा गुवाहाटी उच्च न्यायालय के अधीन था.). अब लंबित मामलों की संख्या घटकर 2,804 रह गई है.”

उन्होंने कहा, “देश में यह एकमात्र उच्च न्यायालय है, जहां मामलों की संख्या में तेजी से कमी दर्ज की गई है.”

न्यायमूर्ति गुप्ता ने कहा कि त्रिपुरा उच्च न्यायालय भारत में एसएमएस सेवा शुरू करने वाला पहला उच्च न्यायालय है, जहां प्रत्येक पक्षकार और उसके वकील को मामले से संबंधित सूचना एसएमएस के माध्यम से मिलती है.

उन्होंने कहा, “इस योजना को हमने शुरू किया. बाद में इसे कई अन्य उच्च न्यायालयों व सर्वोच्च न्यायालय ने अपनाया.”

एसएमएस सेवा को त्रिपुरा के जिला व निचली अदालतों में भी शुरू किया गया है.

अपने कार्यकाल के दौरान, त्रिपुरा में कई महत्वपूर्ण मामलों पर फैसला देने वाले न्यायमूर्ति गुप्ता ने कहा कि त्रिपुरा में सजा की दर कम है.

उन्होंने कहा, “किसी भी घटना के तत्काल बाद प्राथमिकी दर्ज किया जाना चाहिए. पुलिस पहले प्राथमिकी दर्ज करने में आनाकानी करती थी, जिससे जांच में विलंब होता था.”

उन्होंने कहा कि त्रिपुरा में ईमानदारी का स्तर बहुत ऊंचा है. इस वजह से सामाजिक व अन्य योजनाएं बेहतर तरीके से लागू हो पाती हैं.

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