जासूसी प्रकरण में अमरीकी राजदूत तलब

नई दिल्ली | संवाददाता: वाशिंगटन पोस्ट में जासूसी की खबर के बाद अमरीकी राजदूत तलब किये गये. केन्द्र सरकार ने अमरीकी सरकार द्वारा भारत के राजनीतिक दल भाजपा की 2010 से जासूसी करवाने की खबरें आने के बाद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है. बुधवार को अमरीकी राजदूत को मंत्रालय तलब किया गया. सूत्रों का कहना है कि केन्द्र सरकार ने अमरीका से इस तरह के घटना के पुनरावृति को रोकने के लिये कहा है.

दिल्ली स्थित सूत्रों का कहना है कि केन्द्र सरकार ने अमरीका को उसके राजदूत के माध्यम से स्पष्ट कर दिया है कि किसी व्यक्ति तथा संगठन की निजता का उल्लंघन बर्दास्त नहीं किया जायेगा. गौरतलब है कि अमरीकी कानून के अनुसार राष्ट्रीय हितों के लिये दूसरे देशों की जासूसी करवाई जा सकती है. पूर्व अमरीकी ठेकेदार स्नोडेन ने वाशिंगटन पोस्ट के सोमवार के अंक में खुलासा किया था कि इस सूची में भारत के भारतीय जनता पार्टी का नाम शामिल है.

स्नोडेन के खुलासे के अनुसार 2010 को भाजपा की जासूसी करने का अधिकार वहां के एनएसए को अदालत ने दिया था. कितनी विडंबना की बात है कि जिस कानून के तहत दूसरे देशों की जासूसी का अमरीकी राष्ट्र के सुरक्षा के नाम पर वहां कानून के तहत मान्यता दी गई है, उसी से हमारे देश में निजता का उल्लंघन होता है. जाहिर है कि अमरीकी अदालत के फैसले के आड़ में भारत में जासूसी करने की इजाजत नहीं दी जा सकती है.

वाशिंगटन पोस्ट में भाजपा की जासूसी की खबर प्रकाशित होने के बाद से ही इस बात के कयास लगाये जा रहे थे कि मोदी सरकार, अमरीका के इस कदम का वहां के राजदूत को तलब कर, परंपरा अनुसार विरोध किया जायेगा. भारत में अमरीका की अंतरिम राजदूत कैथलीन स्टीफेंस हैं.


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