उत्तर प्रदेश: समाजवादी परिवार में वॉर

लखनऊ | न्यूज डेस्क: उत्तर प्रदेश के समाजवादी परिवार का कलह खुलकर सतह पर आ गया है. ऐन विधानसभा चुनाव के पहले समाजवादी परिवार के भीतर जारी इस रस्साकसी से दूसरे राजनीतिक दलों को लाभ होगा ऐसा जानकारों का मानना है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोमवार को अपने दो मंत्रियों की छुट्टी कर दी है तथा मुख्य सचिव दीपक सिंघल को भी किनारे कर दिया है. दीपक सिंघल को उनके चाचा शिवपाल का खास माना जाता रहा है. उधर, पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह ने शिवपाल यादव को उत्तर प्रदेश समाजवादी पार्टी का अध्यक्ष बना दिया है जिसपर अब तक मुख्यमंत्री अखिलेश यादव थे.

इसके बाद मंगलवार रात को ही मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने चाचा शिवपाल यादव से सारे अहम मंत्रालय- लोक निर्माण, राजस्व और सिंचाई छीन लिये हैं.


अखिलेश ने पीडब्ल्यूडी विभाग अपने पास रखा है. उन्होंने सिंचाई विभाग अवधेश प्रसाद को और राजस्व एवं सहकारिता विभाग बलराम यादव को दे दिया है. शिवपाल के पास इस समय भूमि विकास, जल संसाधन एवं समाज कल्याण जैसे गैर-महत्वपूर्ण विभाग रह गये हैं जाहिर है कि अखिलेश ने अपने चाचा के पर कतर दिये हैं.

इससे पहले पार्टी के राष्टीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को प्रदेश अध्यक्ष के दायित्व से मुक्त कर दिया था और यह जिम्मेदारी सूबे के कद्दावर मंत्री शिवपाल यादव को सौंप दी थी.

सपा के राष्ट्रीय महासचिव प्रोफेसर रामगोपाल यादव ने दिल्ली में एक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी. बयान में कहा गया है कि मुलायम सिंह यादव ने उत्तर प्रदेश में शिवपाल को प्रदेश का नया अध्यक्ष बनाया है. बयान में कहा गया कि उत्तर प्रदेश में शिवपाल के नेतृत्व में पार्टी नई ऊंचाइयों पर पहुंचेगी.

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ही अब तक सपा के प्रदेश अध्यक्ष भी थे. दरअसल, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मंगलवार को ही सूबे के मुख्य सचिव और शिवपाल के करीबी दीपक सिंघल को हटा दिया था. अटकलें लगाई जा रही हैं कि शिवपाल की नाराजगी दूर करने के लिए ही मुलायम ने अब उन्हें उत्तर प्रदेश समाजवादी पार्टी की कमान सौंपी है.

उधर, मुख्य सचिव पद से सिंघल को हटाने की कोई वजह नहीं बताई गई, लेकिन सपा के कुछ नेताओं का मानना है कि मुख्यमंत्री इस बात से खुश नहीं थे कि सिंघल सपा के राज्यसभा सदस्य अमर सिंह द्वारा दिल्ली में दिये गए रात्रिभोज में शामिल हुए थे. इस रात्रिभोज में अखिलेश शामिल नहीं हुये थे. मुलायम और समाजवादी पार्टी के कुछ अन्य शीर्ष नेता इस रात्रिभोज में शामिल हुये थे. बहरहाल, राजनीतिक प्रेक्षकों का मानना है कि इस घटनाक्रम से समाजवादी पार्टी कमजोर ही हुई है.

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