उत्तराखंड: सामने आया नया सीडी

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: उत्तराखंड विधानसभा में फ्लोर टेस्ट के पहले नया सीडी सामने आया है. भाजपा ने रविवार को राज्यपाल केके पॉल को यह सीडी सौंपी है. सीडी के सामने आने के बाद भाजपा ने मांग की है कि देवभूमि में दलाली बंद होनी चाहिये. वहीं हरीश रावत का आरोप है कि उच्च पदों पर तैनात दो नौकरशाह हमारे विधायकों को ब्लैकमेल कर रहें हैं. उत्तराखंड विधानसभा में शक्तिपरीक्षण के मात्र दो दिन पहले एक नए स्टिंग ऑपरेशन का वीडियो सामने आया है.

इस वीडियो में कांग्रेस के एक विधायक को हटाए गए मुख्यमंत्री हरीश रावत के पक्ष में कम से कम पार्टी के एक दर्जन विधायकों को रखने के लिए कथित तौर पर रिश्वत लेते दिखाया गया है. स्टिंग में कांग्रेस विधायक मदन सिंह 12 विधायकों में प्रत्येक के लिए 25-25 लाख रुपये लेने की बात स्वीकार करते हैं.

यह स्टिंग एक समाचार चैनल ने किया है, जिसने इससे पहले एक वीडियो क्लिप जारी किया था जिसमें रावत को कथित रूप से विधायकों की सौदेबाजी में शामिल दिखाया गया था.

रावत ने रविवार को देहरादून में संवाददाताओं से कहा, “हमारे विधायकों और नेताओं को धमकी भरे संदेश भेजे जा रहे हैं कभी रिश्तेदार बनकर, कभी शुभचिंतक, तो कभी जान पहचान वाला बनकर.”

रावत ने आरोप लगाया कि ऊंचे पदों पर तैनात 2 नौकरशाह हमारे विधायकों को ब्लैकमेल कर रहे हैं ताकि हम बहुमत साबित नहीं कर सकें.

उन्होंने आरोप लगाया, “मुझे भी निगरानी में रखा जा रहा है, मानों मैं कोई देशद्रोही हूं.”

वीडियो के बारे में पूछे जाने पर रावत ने कहा कि फिलहाल उनके पास इस बारे में कोई जानकारी नहीं है.

रावत ने इल्ज़ाम लगाए कि उनके और उनके रिश्तेदारों के फ़ोन टैप किए जा रहे हैं.

उन्होंने कहा, “केंद्रीय जांच एजेंसियां कांग्रेस के लोगों को अलग-अलग तरीकों से परेशान कर रही हैं.”

रावत ने कहा, “केंद्रीय एजेंसियों का खुलकर दुरुपयोग हो रहा है. केवल मेरे विधायक ही नहीं, बल्कि नेताओं को भी धमकाया जा रहा है.”

भारतीय जनता पार्टी ने इस पर रविवार को कहा, “रावत सत्ता के भूखे हैं और वे सत्ता में बने रहने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं.”

भाजपा सांसद और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोशियारी ने यहां कहा, “मैं इसे दानवी खेल कहूंगा. देव भूमि की यह दलाली तत्काल बंद होनी चाहिए.”

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के नेतृत्व में कांग्रेस के नौ विधायकों ने रावत के खिलाफ विद्रोह कर दिया था. उसके बाद हरीश रावत सरकार को केंद्र ने संविधान के अनुच्छेद 356 का इस्तेमाल कर 27 अप्रैल को बर्खास्त कर दिया था.

सर्वोच्च न्यायालय ने रावत को विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए 10 मई की तिथि निर्धारित की है.

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