मानसून सत्र पर व्यापमं का अंधेरा

भोपाल | समाचार डेस्क: मप्र विधानसभा को व्यापमं के हंगामे के चलते तीन दिनों में ही अनिश्चितकाल के लिये स्थगित करना पड़ा. मानसून सत्र के तीसरे दिन भी विपक्षी दलों के हंगामे के दबाव के चलते विधानसभा में भारी हंगामा हुआ. जाहिर है कि व्यापमं के मुद्दे पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को कांग्रेस तथा विपक्षी दलों ने घेर लिया है.

मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन व्यावसायिक परीक्षा मंडल घोटाले और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी के विधायकों के हंगामे के बीच कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया. वहीं बसपा की महिला विधायक को चप्पल दिखाने का सत्तापक्ष के विधायक पर आरोप लगा है. मानसून सत्र 31 जुलाई तक चलना था, मगर पहले ही दिन से व्यापमं और मुख्यमंत्री चौहान के इस्तीफे की मांग को लेकर हंगामे का दौर शुरू हो गया था. शुरुआती दो दिन विधानसभा की कार्यवाही हंगामे की भेंट चढ़ गई. बुधवार को भी हंगामे के हालात थे. बसपा और कांग्रेस लगातार मुख्यमंत्री का इस्तीफा मांगते हुए सदन में हंगामा करती रही, वहीं सरकार ने अनुपूरक बजट पारित कराने से लेकर अन्य सभी शासकीय कार्य संपादित करा लिए.


हंगामा बढ़ते देख संसदीय कार्यमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने सभी शासकीय कार्य पूरे हो जाने का हवाला देते हुए कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने का प्रस्ताव रखा जिसे अध्यक्ष सीता शरण शर्मा ने स्वीकार करते हुए कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया.

विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन बुधवार को बसपा विधायक विधानसभा में नीले रंग का एप्रिन पहनकर आए थे, जिस पर लिखा था ‘खूनी व्यापमं घोटाले के दोषी शिवराज सिंह इस्तीफा दो.’ कार्यवाही शुरू होते ही बसपा व कांग्रेस विधायकों ने नारेबाजी की. विधायक अध्यक्ष की आसंदी (वैल) के सामने आकर नारेबाजी करते रहे. इसके चलते सत्ता पक्ष और विपक्षियों में तीखी नोक झोंक हुई.

अध्यक्ष सीता शरण शर्मा ने पहले कार्यवाही को 10 मिनट के लिए स्थगित किया. दोबारा कार्यवाही शुरू होते ही हंगामा फिर होने लगा. इसी दौरान बसपा की महिला विधायक उषा चौधरी और शीला त्यागी ने आरोप लगाया कि भाजपा विधायक नरेंद्र कुशवाहा ने उन्हें चप्पल दिखाई है. इस पर हंगामा और बढ़ गया. भाजपा विधायक कुशवाहा का कहना है कि उन्होंने तो जमीन की तरफ इशारा किया था. हंगामा बढ़ने पर साढ़े 11 बजे तक के लिए कार्यवाही को स्थगित किया गया. तीसरी बार भी कार्यवाही शुरू हुई और हंगामा नहीं थमा.

विधानसभा में एक तरफ हंगामा होता रहा, वहीं सरकार ने तमाम शासकीय कार्य पूरे कर लिए. विधानसभाध्यक्ष द्वारा सदन को स्थगित किए जाने के फैसले के खिलाफ कांग्रेस विधायकों ने जमकर नारेबाजी की और सदन के भीतर धरने पर बैठ गए, बाद में कांग्रेस विधायक बाहर आए. नेता प्रतिपक्ष सत्यदेव कटारे ने सरकार और विधानसभाध्यक्ष पर मनमानी का आरोप लगाया है.

वहीं सरकार के प्रवक्ता और संसदीय कार्यमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने सदन को न चलने देने के लिए विपक्ष को जिम्मेदार ठहराया. उनका कहना था, “सरकार हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार थी मगर कांग्रेस चर्चा से भाग रही है.”

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