दिल्ली भाजपा का चेहरा कौन?

नई दिल्ली | विशेष संवाददाता: भाजपा संसदीय बोर्ड की बैठक में संभवतः किरण बेदी को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जायेगी. दिल्ली विधानसभा का चुनाव लड़ने के लिये भाजपा को दिल्ली में एक चेहरे की जरूरत है. किरण बेदी के भाजपा में शामिल हो जाने के बाद कयासों का दौर तेज है कि दिल्ली की कमान भाजपा किरण बेदी को सौंप सकती है. इसके लेकर दिल्ली भाजपा के पुराने नेता परेशान हो सकते हैं परन्तु भाजपा की संसदीय बोर्ड का नजरिया निश्चित तौर पर उससे जुदा होगा. संसदीय बोर्ड हमेशा चाहेगा कि दिल्ली में भाजपा की सरकार बने जिसके लिये उन्हें किसी को मुख्यमंत्री के रूप में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जनता के सामने पेश करना होगा. इस चेहरे के लिये किरण बेदी एक मजबूत उम्मीदवार के रूप में उभरी है.

वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए भाजपा संसदीय बोर्ड दिल्ली के मुख्यमंत्री पद के लिये किरण बेदी का नाम घोषित कर सकती है. यह भी हो सकता है कि किरण बेदी को परोक्ष रूप से पेश करते हुए उन्हें दिल्ली विधानसभा चुनाव के प्रचार की कमान सौंप दे. भाजपा में वर्ष 2013 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी सबसे पहले चुनाव प्रचार की कमान सौंपी गई थी बाद में उन्हें प्रधानमंत्री के रूप में जनता के सामने प्रस्तुत किया गया था.

दिल्ली में गत दिनों हुए प्रधानमंत्री मोदी की सभा में उन्होंने कांग्रेस का नाम तक नहीं लिया था. नाम तो मोदी ने आम आदमी पार्टी का भी नहीं लिया था परन्तु उनके निशाने पर अरविंद केजरीवाल ही थे. जाहिर सी बात है कि भाजपा केजरीवाल के मुकाबले में किरण बेदी को मैदान में उतारना चाहेगी क्योंकि दोनों की पृष्ठभूमि एक सी है. किरण बेदी तथा अरविंद केजरीवाल को अन्ना हजारे के जन लोकपाल आंदेलन की देन कहा जा सकता है. किरण बेदी के दिगर कम से कम अरविंद केजरीवाल का इतिहास अन्ना हजारे से जुड़ा हुआ है. किरण बेदी के पास तो ‘क्रेन बेदी’ की उपाधि तथा तिहाड़ जेल को एक आश्रम में तब्दील कर देने की सफलता पहले से ही मौजूद है.

लोकसभा चुनाव के नतीजे एलान करते हैं कि दिल्ली में भाजपा के बाद आम आदमी पार्टी दूसरे नंबर पर रही थी. ऐसे में भाजपा का मुकाबला दिल्ली विधानसभा के चुनाव में कांग्रेस से नहीं वरन् आम आदमी पार्टी से होने जा रहा है. अरविंद केजरीवाल कुछ भी हो लेकिन वे यथा स्थितिवादी नहीं हैं. आम आदमी पार्टी के द्वारा जो कुछ भी संघर्ष किया गया है उससे जाहिर होता है कि वे वर्तमान व्यवस्था में सतही बदलाव तो जरूर चाहते हैं जिससे जनता का आकर्षित होना लाजिमी है. ऐसे में भाजपा को अरविंद केजरीवाल की तोड़ के रूप में किरण बेदी से बेहतर कौन सा चेहरा मिल सकता है जिसने अन्ना हजारे के आंदोंलन में मुख्या भूमिका निभाई थी.

भारतीय जनता पार्टी की संसदीय बोर्ड की बैठक सोमवार शाम राष्ट्रीय राजधानी में होगी, जिस दौरान दिल्ली विधानसभा के उम्मीदवारों के नाम पर फैसला किया जाएगा. भाजपा में शामिल हुईं भारतीय पुलिस सेवा की पूर्व अधिकारी किरन बेदी संभवत: पार्टी के चुनाव प्रचार का नेतृत्व करेंगी. सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के नाम पर संभवत: कोई फैसला नहीं किया जाएगा.

सूत्रों के अनुसार, 70 सीटों के उम्मीदवारों के नाम की घोषणा सोमवार को बैठक के बाद या फिर मंगलवार सुबह किया जाएगा.

सूत्रों ने बताया कि किरन के भाजपा में शामिल होने से पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और सांसद असहज महसूस कर रहे हैं, क्योंकि वह खुद को भाजपा की मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार के रूप में पेश कर रही हैं, जिस पर अब तक कोई फैसला नहीं किया गया है. बहरहाल, सोमवार शाम के बाद ही पता चल सकेगा कि दिल्ली भाजपा का चेहरा कौन बनने जा रहा है.

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