भाजपा में ही ओपी का विरोध

रायपुर | डेस्क: ओपी चौधरी को क्या भाजपा में ही विरोध झेलना पड़ेगा? कम से कम भाजपा के कुछ नेता तो अभी से नाराजगी मोड में नजर आ रहे हैं. हालांकि गुरुवार को ओपी चौधरी के छत्तीसगढ़ लौटने पर बड़े रोड शो की तैयारी भी भाजपा कर रही है. रायगढ़ में होर्डिंग भी टंग गये हैं. भाजपा के अधिकांश नेता ओपी चौधरी के भाजपा में शामिल होने को एक शुभ संकेत के तौर पर देख रहे हैं.

रायपुर के कलेक्टर और आईएएस अधिकारी ओपी चौधरी ने जब अपने पद से इस्तीफा दिया तो चार दिनों तक तो मुख्यमंत्री समेत भाजपा के दूसरे विधायक और नेता इस पर कोई प्रतिक्रिया देने से बचते रहे. इन नेताओं ने ओपी चौधरी के राजनीतिक फैसले की प्रतीक्षा के हवाले से टिप्पणी नहीं की. लेकिन मंगलवार को हालत बदल गये.


मंगलवार को पूर्व आईएएस चौधरी ने भाजपा का दामन थामा और फिर प्रतिक्रियाओं का सिलसिला शुरु हो गया. पहली प्रतिक्रिया दिल्ली से छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की आई, जिसमें उन्होंने ओपी चौधरी को संभावनाशील नेता बताया. लेकिन रायपुर और छत्तीसगढ़ के दूसरे इलाकों में प्रतिक्रिया ऐसी नहीं थी. औपचारिक तौर पर ऑन द रिकार्ड तो नेता ओपी चौधरी की तारीफ करते रहे लेकिन जहां कैमरा और रिकार्डर बंद होने का अहसास हुआ, नेताओं के मन की बात बाहर निकल गई.

रायपुर में भाजपा के एक विधायक ने कहा कि अब ओपी चौधरी को समझ में आयेगा कि राजनीति क्या होती है. विधायक महोदय ने कहा कि जब जिला अध्यक्ष कहेंगे तो उन्हें दरी पर सामान्य कार्यकर्ताओं के साथ बैठना पड़ेगा. उनका कहना था कि कलेक्टर रहते ये विधायकों को वेट करवाते थे. अब इन्हें राजनीति का असली मतलब समझ में आयेगा.

वहीं राज्य सरकार के एक मंत्री ने टिप्पणी की कि ओपी चौधरी के आने से कोई खास फायदा नहीं होने वाला है. उन्होंने कहा कि लोग उन्हें अभी से मुख्यमंत्री पद तक का दावेदार बता रहे हैं लेकिन उन्हें राजनीति सीखनी होगी. मंत्री जी का कहना था कि जैसा अनुमान लगाया जा रहा है और जो माहौल बनाया जा रहा है, उससे पार्टी को कितना नफा-नुकसान होगा, इसका पता जल्दी ही लग जायेगा.

भाजपा के ही एक अन्य विधायक ने कहा कि किसी कहीं से ला कर अगर थोप दिया जायेगा तो भाजपा के दूसरे कार्यकर्ताओं और नेताओं का क्या होगा. विधायक महोदय का कहना था कि जिसे भी राजनीति में आना है, वह बेशक आये लेकिन उसे दूसरे कार्यकर्ताओं की तरह ही रहना होगा. उनका कहना था कि ओपी चौधरी को पार्टी में शामिल करने का निर्णय ऊपर के स्तर पर लिया गया है. ऐसे में संगठन की मजबूरी है कि वह इस निर्णय में साथ दिखे.

One thought on “भाजपा में ही ओपी का विरोध

  • August 29, 2018 at 20:35
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    सत्ता की लोलुपता और पूंजीवाद की प्रतीक बन गया है राजनीति तभी तो एक कलेक्टर को राजनीति में आना पड़ रहा है नही तो एक प्रसाशनिक अधिकारी को जनता की सेवा करने के लिए कलेक्टरी से अच्छा नेतागिरी नही है ।

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