स्वाध्यायी छात्रों को कोरोना से ख़तरा नहीं?

रायपुर | संवाददाता: क्या कॉलेजों में प्राईवेट अध्ययन करने वालों को कोरोना का कोई ख़तरा नहीं है? कम से कम छत्तीसगढ़ सरकार तो यही मान कर चल रही है कि रेग्यूलर यानी नियमित पढ़ाई करने वाले छात्रों को तो कोरोना का ख़तरा है लेकिन प्राईवेट या स्वाध्यायी छात्रों को कोरोना से कोई ख़तरा नहीं है.

राज्य सरकार का यह निर्णय हज़ारों छात्रों को मौत के मुंह में धकेलने वाला साबित हो सकता है.


राज्य भर में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच छत्तीसगढ़ सरकार ने फ़ैसला लिया है कि शिक्षा सत्र 2019-20 की विश्वविद्यालयीन परीक्षाओं के अंतर्गत सिर्फ अंतिम वर्ष एवं अंतिम सेमेस्टर की परीक्षाएं आयोजित होंगी. इनको छोड़कर अन्य सभी कक्षाओं की वार्षिक या सेमेस्टर परीक्षा नहीं ली जाएंगी. इन सभी छात्रों को जनरल प्रमोशन दिया जायेगा.

जनरल प्रमोशन का लाभ अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़ कामधेनु विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानन्द तकनीकी विश्वविद्यालय, पं. दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, पण्डित सुन्दरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय, बस्तर विश्वविद्यालय, मैट्स विश्वविद्यालय, सरगुजा विश्वविद्यालय, हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय और हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के छात्रों को मिलेगा.

लेकिन राज्य सरकार ने यह अनूठा फैसला लिया है कि स्वाध्यायी विद्यार्थियों के लिए सभी परीक्षा का आयोजन अनिवार्य रुप से किया जायेगा. अनुमान है कि लगभग 99 हजार स्वाध्यायी छात्र रायपुर के पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में, 90 हजार छात्र बिलासपुर विश्वविद्यालय में, 80 हजार दुर्ग विश्वविद्यालय में, 20 हज़ार बस्तर विश्वविद्यालय में और 30 हज़ार छात्र सरगुजा सरगुजा विश्वविद्यालय में परीक्षा देंगे.

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