जोगी की जाति पर सुनवाई से इंकार

बिलासपुर | संवाददाता: अजीत जोगी की जाति की सुनवाई हाईकोर्ट में नहीं हो सकी.

पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की जाति मामले की सुनवाई करने से जस्टिस संजय के अग्रवाल ने इंकार करते हुये मामला दूसरी बेंच में भेजने कहा.


सोमवार को मरवाही के पूर्व विधायक पहलवान सिंह और भाजपा नेता समीरा पैकरा ने 200 आदिवासियों के साथ एक याचिका दायर करते हुये आरोप लगाया था कि अजीत जोगी और उनका परिवार आदिवासी नहीं है. लेकिन वो फर्जी दस्तावेजों के जरिए आदिवासी बने हुए हैं और मरवाही सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. याचिका में कहा गया कि इस तरह से अजीत जोगी आदिवासियों का हक छीन रहे हैं.

अजीत जोगी की जाति को लेकर पिछले कई सालों से विवाद चलता रहा है. पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष बनवारी लाल अग्रवाल ने 11 जुलाई, 2002 को अजीत जोगी के विरुद्ध फर्जी जाति प्रमाण पत्र लेने का आरोप लगाते हुये जनहित याचिका दायर की थी. जोगी की जाति के मामले में न्यायमूर्ति पी.सी. नायक और न्यायमूर्ति फखरूद्दीन की अदालत ने अपने आदेश में इसकी सुनवाई से बिना कोई कारण बताए इनकार कर दिया था.

बाद में लगभग 10 साल बाद हाईकोर्ट के जस्टिस सुनील कुमार सिन्हा ने पूर्व में अजीत जोगी का वकील होने का हवाला देते हुये अजीत जोगी के जाति प्रमाण पत्र की सीबीआई जांच कराए जाने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया था. बाद में 2013 में मामले की सुनवाई करते हुये छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जोगी की जाति से संबंधित सारे दस्तावेज अदालत में पेश करने के आदेश दिये और अदालत में 1967 से अब तक के समस्त रिकार्ड मांगे गये.

गौरतलब है कि 13 अक्टूबर 2011 को सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार को आदेश दिया था कि वह अजीत जोगी की जाति के पूरे मामले की हाई पावर कमेटी से जांच कराये.

अदालत ने कहा था कि अजीत जोगी की जाति पर निर्णय राज्य-स्तरीय छानबीन समिति सर्वोच्च न्यायालय द्वारा माधुरी पाटिल प्रकरण में निर्धारित विधि के अनुसार करेगी और अपनी रिपोर्ट 3 महीने के अन्दर उसे सौपेगी. इसके बाद अजीत जोगी ने अदालत के इस आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की थी. तब से यह मामला अदालती की देहरी तक पहुंचता रहा है और विवादों में उलझता रहा है.

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