मोदी राज में कोलगेट की जांच हो

रायपुर | संवाददाता: कोल ब्लॉक को निजी कंपनियों को देने से भारी नुकसान हो रहा है. सीपीएम के छत्तीसगढ़ राज्य के सचिव संजय पराते ने आरोप लगाया है कि प्रतिस्पर्धी नीलामी की जगह एमडीओ (माइनर डेवलपर-कम-ऑपरेटर) के जरिये छत्तीसगढ़ के 14 कोल ब्लॉकों को, जहां 5305 मिलियन टन कोल रिज़र्व है, को कार्पोरेट कंपनियों को आबंटित किये जाने सरकारी खजाने को 12.5 लाख करोड़ रूपये से ज्यादा का नुकसान और कार्पोरेट कंपनियों को इतना ही फायदा पहुंचाया गया है. उन्होंने इसकी जांच की मांग की है.

गौरतलब है कि यूपीए सरकार द्वारा आबंटित 214 कोयला खदानों का आबंटन रद्द करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिस्पर्धी नीलामी के जरिये पुनः इनका आबंटन करने का सरकार को निर्देश दिया था. लेकिन सत्ता में आने के बाद भाजपा सरकार ने इन निर्देशों का उल्लंघन करते हुए छत्तीसगढ़ के 14 कोल ब्लाकों सहित देश के 61 कोल ब्लॉक, जहां कुल 17317 मिलियन टन कोयला रिज़र्व है, को उन सरकारी कंपनियों को आबंटित कर दिया है, जिन्होंने निजी कार्पोरेट कंपनियों के साथ संयुक्त उपक्रम बनाकर रखा हुआ है. इससे इन कोल ब्लाकों पर पूरा नियंत्रण ही निजी कंपनियों को मिल गया है, जबकि खनन की पूरी लागत सरकारी कंपनियों को ही लगानी है. ऐसा करना सुप्रीम कोर्ट की भावना का सीधा-सीधा उल्लंघन है.


संजय पराते ने आरोप लगाया है कि आबंटन के इस तरीके से कार्पोरेट घरानों को रायल्टी में छत्तीसगढ़ में औसतन प्रति टन 2400 रूपये तथा देश में औसतन 3500 रूपये प्रति टन का फायदा मिल रहा है. छत्तीसगढ़ और देश में आबंटित खदानों के कुल रिज़र्व के हिसाब से यह फायदा छत्तीसगढ़ में 12.5 लाख करोड़ और देश के पैमाने पर 60 लाख करोड़ रूपये से अधिक बैठता है. कार्पोरेट कंपनियों को फायदा देश और प्रदेश के राजस्व का सीधा नुकसान है.

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