बीएल की गिरफ्तारी को HC में चुनौती

बिलासपुर | संवाददाता: बीएल अग्रवाल की गिरफ्तारी को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है. छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ आईएएस अफसर बीएल अग्रवाल को सीबीआई द्वारा 21 फऱवरी को गिरफ्तार किये जाने के खिलाफ छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में जस्टिस पी सैम कोशी की एकल पीठ ने इसे सुनवाई के लिये स्वीकार कर सीबीआई तथा राज्य शासन को नोटिस जारी करते हुये अगली सुनवाई के लिये 19 अप्रैल की तारीख तय की गई है.

हाईकोर्ट में दाखिल याचिका के मुताबिक सीबीआई ने 18 फऱवरी को दिल्ली में एफआईआर दर्ज की उसके बाद 19 फरवरी को रायपुर में आईएएस बीएल अग्रवाल के निवास में छापा मारा था. 21 फरवरी को सीबीआई ने बीएल अग्रवाल को गिरफ्तार कर बिना किसी सूचना के दिल्ली ले जाया गया. जहां पर उन्हें रिमांड पर लेकर पूछताछ की गई है.


इस याचिका के दाखिल होने के बाद सीबीआई को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को बताना पड़ेगा कि ऐसा कोई अधिकार उऩके पास है या नहीं. याचिका में कहा गया है कि सीबीआई एक विशेष पुलिस बल है. सीबीआई को दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम के तहत दिल्ली की भौगोलिक सीमा के भीतर कार्यवाही का अधिकार है. सीबीआई को किसी दूसरे राज्य जैसे छत्तीसगढ़ में कार्यवाही करने के लिये लिखित में अनुमति लेना जरूरी है.

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ शासन ने साल 2012 में ही अधिसूचना जारी करके यह स्पष्ट कर दिया था कि सीबीआई को प्रत्येक मामले में राज्य शासन से अलग से अनुमति मांगने की आवश्यकता है और कोई भी आम सहमति सीबीआई के पक्ष में प्रभावी नहीं है.

उल्लेखनीय है कि बाबूलाल अग्रवाल के खिलाफ सीबीआई में चल रहे अपने मामले को खत्म करने के लिये कथित रुप से पीएमओ के अधिकारियों को रिश्वत देने का आरोप है. 18 फरवरी को सीबीआई ने बाबूलाल के घर छापा मार कर कई घंटों तक पूछताछ की थी और दस्तावेजों को जब्त किया था. 1988 बैच के बाबूलाल अग्रवाल गिरफ्तारी के वक्त छत्तीसगढ़ सरकार में उच्च शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव थे. बाबूलाल अग्रवाल को सीबीआई अपने साथ दिल्ली ले गई. दिल्ली में बाबूलाल अग्रवाल को अदालत में पेश किया गया था. तब से बाबूलाल अग्रवाल सहित अन्य आरोपी तिहाड़ जेल में बंद हैं.

बाबूलाल अग्रवाल का नाम 2010 में पहली बार उस समय चर्चा में आया था, जब उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में आयकर विभाद की कार्रवाई हुई थी. बाबूलाल पर आरोप लगा कि उन्होंने रायपुर ज़िले के खरोरा के 220 गांव वालों के नाम से फर्जी बैंक खाते खुलवा कर उसमें भारी निवेश किया है. बाबूलाल पर 253 करोड़ की संपत्ति तथा 85 लाख के बीमा की खबरें सामने आई थीं.

इसकी कई कहानियां छपी, अफवाहें उड़ीं, बाबू लाल निलंबित हुये और अंततः सरकार ने बाबूलाल अग्रवाल को बेदाग घोषित करते हुये उन्हें महत्वूर्ण पद दे दिया. बाबूलाल अग्रवाल का दावा है कि उन्होंने पूरे मामले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी, जिसके बाद उन्हें बेदाग घोषित किया गया.

इधर आयकर विभाग ने इस मामले को सीबीआई को सौंप दिया था और आरोप है कि इसी मामले को खत्म करने के लिये कथित रुप से डेढ़ करोड़ की रिश्वत देने की कोशिश की गई. यहां तक कि इस मामले में सीबीआई ने रिश्वत के रुप में दिये जाने वाला दो किलोग्राम सोना भी जब्त किया था.

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