अफसरों के ग्रुप में पोर्न वीडियो

रायपुर | संवाददाता: गृहमंत्री के विशेष सचिव के नंबर से वाट्सएप पर पोर्न वीडिया डाला. छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री के विशेष सचिव सीएल भाया के मोबाइल फोन नंबर 9826194362 से वाट्सएप के ‘इंद्रावती आफिसर्स’ ग्रुप में गुरुवार रात 11 बजकर 10 मिनट पर आधा दर्जन अश्लील वीडियो पोस्ट किया गया है. इस ग्रुप में कुछ महिला आफिसर्स भी हैं. ग्रुप में अश्लील वीडियो डाले जाने से वे भी हैरत में हैं.

वाट्सएप पर ‘इंद्रवती आफिसर्स’ ग्रुप के एडमिन और इंद्रावती भवन संचनालय के उप संचालक कमल वर्मा ने इस बारे में हिन्दी के एक दैनिक अखबार को कहा कि उन्हें ग्रुप के एक सदस्य ने फोन पर इसकी जानकारी दी है. उसके बाद सीएल भार्या को ग्रुप से हटा दिया गया है.


‘इंद्रावती ऑफिसर्स’ ग्रुप में अश्लील वीडियो पोस्ट किये जाने के बाद उसके एक सदस्य ने ग्रुप एडमिन को लिखा, “वर्मा जी, शायद यह ग्रुप शासकीय सेवकों का आपस में समस्या निदान और नियमों की जानकारी के लिये बना होगा न कि ब्लू फिल्म शेयर करने के लिये. उम्मीद है कि ऐसे व्यक्ति को तत्काल ग्रुप से अलग करेंगे.”

वहीं सीएल भार्या का कहना है कि उनका फोन एक टैब से कनेक्टेड था जो गुरुवार शाम खो गया था. जिसको टैब मिली होगा, उसी ने उसमें आपत्तिजनक वीडियो डाला है. उन्होंने कहा कि वे पुलिस में शिकायत दर्ज करवायेंगे.

इस मामले में गृहमंत्री रामसेवक पैकरा का कहना है कि वाट्सएप ग्रुप में अश्लील वीडियो की उन्हें कोई जानकारी नहीं है. इस संबंध में जानकारी लेने के बाद दोषी अधिकारी के खिलाफ कार्यवाही की जायेगी.

इस खबर के बाद गृहमंत्री के विशेष सचिव सीएल भार्या ने ‘हमर छत्तीसगढ़’ नाम के वाट्यएप ग्रुप को भी छोड़ दिया है.

इससे पहले भी वाट्सएप ग्रुप में अश्लील वीडियो डालने का मामला सामने आया था. जिसके बाद ग्रुप को ही डिलीट कर दिया गया था.

उल्लेखनीय है कि भारत में आईटी ऐक्ट की धारा 67 के तहत ऐसी सामग्री जो कामुक हो और जिसे पढ़ने, देखने और सुनने से किसी का चरित्र बिगड़ सकता हो, का इलेक्ट्रॉनिक तरीके से प्रकाशन या उसे बांटना दंडनीय अपराध है.

पहली बार प्रकाशन या बांटने के लिए दोषी पाये जाने पर एक लाख रुपये तक जुर्माना और पांच साल तक क़ैद और दोबारा दोषी पाये जाने पर दो लाख रुपये तक जुर्माना और दस साल तक की जेल की सज़ा हो सकती है.

इसके साथ ही धारा 67ए ‘सेक्सुअली एक्सप्लिसिट’ सामग्री का इलेक्ट्रॉनिक तरीके से प्रकाशन या उसे बांटने को अपराध करार देती है.

पहली बार दोषी पाये जाने पर पांच साल कैद, 10 लाख रुपए तक जुर्माना और दोबारा दोषी पाये जाने पर सात साल कैद और 10 लाख रुपए तक जुर्माना हो सकता है.

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